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सहारा शहर में 245 एकड़ में बनेगी नई विधानसभा, बदलेगा राजधानी का पावर सेंटर, कवायद तेज

By संतोष सिंह 
Updated Date

लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ में गोमतीनगर स्थित सहारा शहर (Sahara City) की जमीन पर विधानभवन बनाने की कवायद तेज हो गई है। एलडीए (LDA) ने शासन के निर्देश पर कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एलडीए (LDA) के अधिकारी ने बताया कि करीब 10 महीने पहले एलडीए (LDA)  ने सहारा शहर (Sahara City) में अपने हिस्से की 75 एकड़ जमीन कब्जे में ली थी। इसके बाद सितंबर में लखनऊ नगर निगम (Lucknow Municipal Corporation) ने अपने हिस्से की 170 एकड़ जमीन को लीज निरस्त करने के बाद कब्जे में लिया था। इस तरह कुल 245 एकड़ जमीन खाली हो गई है। अब इसी जमीन पर नया विधानभवन (New Legislative Building) बनाने की तैयारी है।

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जमीन की पैमाइश रिपोर्ट भेजी जा चुकी

शासन के निर्देश पर जमीन की पैमाइश रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। उच्च स्तर पर यहां विधानभवन निर्माण के लिए सहमति बन चुकी है। आगे की प्रक्रिया के लिए ही कंसल्टेंट नियुक्त करने और उसके जरिये डीपीआर (DPR) और डिजाइन तैयार करने की तैयारी है। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार (LDA VC Prathamesh Kumar) ने बताया कि कि सहारा शहर (Sahara City) की जमीन पर विधानभवन निर्माण के संबंध में प्रक्रिया चल रही है।

कई वर्ष से थी जमीन की तलाश

जानकारों का कहना है कि सरकार नया विधानभवन बनाने के लिए करीब 200 एकड़ जमीन की तलाश कई वर्ष से कर रही थी। यहां नगर निगम की 170 और एलडीए की 75 एकड़ जमीन मिलाकर कुल जमीन 245 एकड़ है। यह जगह लोकेशन व आवागमन के हिसाब से भी उपयुक्त भी है। इसी वजह से शासन ने इसी जगह पर नया विधानभवन बनाने का मन बनाया है।

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नए विधानभवन से होंगी ये सहूलियतें

लोकभवन (Lok Bhavan) और विधानभवन में मुख्यमंत्री के आने और वहां से लौटने के समय कई जगह ट्रैफिक रोका जाता है। इससे लोगों को सहूलियत मिल जाएगी। वर्तमान विधानभवन के आसपास पार्किंग की बड़ी समस्या है। बड़ी संख्या में गाड़ियां सड़क पर खड़ी होती हैं। इससे राहत मिल सकती है। हजरतगंज और लालबाग में बड़े अस्पताल और स्कूल भी हैं ऐसे में वीआईपी मूवमेंट के समय ट्रैफिक बंद किए जाने से लोगों को परेशानी होती है जो दूर होगी। नए विधानभवन के बनने के बाद हजरतगंज को बेहतर पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करना आसान होगा। अभी सुरक्षा कारणों और यातायात दबाव के कारण कई योजनाएं नहीं बन पा रहीं।

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