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भारत आ रहा ईरानी कच्चे तेल का जहाज भेज गया चीन, मामला बढ़ने के बाद पेट्रालियम मंत्रालय ने जारी किया बयान

By Satish Singh 
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नई दिल्ली। पेट्रोलियम मंत्रालय ने शनिवार को उन रिपोर्टों का खंडन किया, जिनमें यह आरोप लगाया गया था कि भारत आ रहा ईरानी कच्चे तेल का एक जहाज़ भुगतान संबंधी दिक्कतों के कारण चीन भेज दिया गया। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि कच्चे तेल के आयात को लेकर भारत को भुगतान संबंधी किसी भी बाधा का सामना नहीं करना पड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए मंत्रालय ने कहा कि बिल ऑफ़ लैडिंग में अक्सर डिस्चार्ज पोर्ट और डेस्टिनेशन सिर्फ़ संकेत के तौर पर दिए होते हैं और समुद्र में चल रहे कार्गो व्यापार को बेहतर बनाने और ऑपरेशनल सुविधा के आधार पर यात्रा के बीच में ही अपना डेस्टिनेशन बदल सकते हैं।

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पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि ईरानी कच्चे तेल के कार्गो को पेमेंट की दिक्कतों की वजह से भारत के वाडिनार से चीन की ओर मोड़े जाने की खबरें पूरी तरह से गलत हैं। भारत 40 से ज़्यादा देशों से कच्चा तेल आयात करता है और कंपनियों के पास व्यापारिक ज़रूरतों के आधार पर अलग-अलग स्रोतों और जगहों से तेल खरीदने की पूरी आज़ादी होती है। मध्य-पूर्व में सप्लाई में रुकावटों के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतें पूरी कर ली हैं, जिसमें ईरान से आने वाला तेल भी शामिल है। जैसा कि कुछ अफवाहें फैलाई जा रही हैं, ईरानी कच्चे तेल के आयात में पेमेंट को लेकर कोई रुकावट नहीं है। जहाज़ का रास्ता बदलने के बारे में किए जा रहे दावे इस बात को नज़रअंदाज़ करते हैं कि तेल का व्यापार कैसे काम करता है। बिल ऑफ़ लैडिंग में अक्सर डिस्चार्ज पोर्ट और डेस्टिनेशन सिर्फ़ संकेत के तौर पर दिए होते हैं। समुद्र में चल रहे कार्गो व्यापार को बेहतर बनाने और ऑपरेशनल सुविधा के आधार पर यात्रा के बीच में ही अपना डेस्टिनेशन बदल सकते हैं। LPG सप्लाई से जुड़ी अफवाहों पर सफाई देते हुए मंत्रालय ने साफ किया कि LPG जहाज़ सी बर्ड, जिसमें करीब 44 TMT ईरानी LPG लदी थी, गुरुवार को मंगलौर पहुंचा और अभी वहां से माल उतारा जा रहा है।

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