नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने अपने सात राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के फैसले को असंवैधानिक बताते हुए उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की है। पार्टी नेता संजय सिंह ने प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि शनिवार को कहा कि AAP राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर इन सांसदों को उच्च सदन से अयोग्य घोषित करने का अनुरोध करेगी। संजय सिंह ने दल-बदल विरोधी कानून का हवाला देते हुए कहा कि राज्यसभा और लोकसभा में किसी भी प्रकार के विभाजन या गुट को कानूनी मान्यता नहीं है, चाहे उसमें दो-तिहाई बहुमत ही क्यों न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो संविधान की दसवीं अनुसूची और न ही दल-बदल विरोधी कानून किसी अलग गुट या समूह को मान्यता देता है।
पढ़ें :- राघव चड्ढा के Instagram में 1 मिलियन फॉलोअर्स हुए कम, अभी भाजपा से जुड़े सिर्फ 24 घंटे ही हुए..
उन्होंने कहा कि भाजपा में शामिल होने वाले सात सांसदों का यह कदम पूरी तरह से अवैधानिक और असंवैधानिक है। AAP इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति से इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करेगी। शुक्रवार को AAP के राज्यसभा सांसद Raghav Chadha, Sandeep Pathak और अशोक मित्तल ने घोषणा की थी कि वे और चार अन्य सांसद भाजपा में शामिल हो रहे हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने कहा था कि AAP के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 भाजपा के साथ विलय के लिए तैयार हैं।
इस घटनाक्रम ने राज्यसभा की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। AAP का मानना है कि सांसदों का यह कदम सीधे तौर पर दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन है, इसलिए उनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए। अब सबकी नजर राज्यसभा के सभापति के फैसले पर टिकी है। यह देखना अहम होगा कि इस बड़े राजनीतिक विवाद पर क्या संवैधानिक कार्रवाई होती है।