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China Gaokao: भारत में NEET पर बवाल, उधर चीन की गाओकाओ परीक्षा बेमिसाल!

दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा चीन में आयोजित हो रही है, जिससे देश भर की यूनिवर्सिटी में छात्रों को एडमिशन का मौका मिलेगा। चीन की इस परीक्षा के लिए 1.29 करोड़ छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

By Sushil Sah 
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बीजिंग: पिछले महीने भारत में पेपर लीक होने की वज​ह से NEET-UG की परीक्षा रद्द हो गई थी, जिसकी वजह से पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। इसे लेकर हाल ही में नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। सिर्फ NEET पेपर लीक ही अकेला मामला नहीं है। इसके अलावा हाल के महीनों में कई परीक्षाओं में अनियमितता और गड़बड़ी सामने आई है, जिसकी वजह से भारत में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। लेकिन इसी बीच दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा चीन आयोजित कर रहा है।

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रविवार को Gaokao परीक्षा जो कि चीन में शुरू हुई, पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। इसमें शामिल होने वाले छात्रों की संख्या अधिक होने की वजह से इसे दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा कहा जाता है। यह परीक्षा यानी नेशनल कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम या गाओकाओ परीक्षा हाईस्कूल के आखिरी साल के छात्रों के लिए की जाती है। इस परीक्षा के आधार पर छात्रों को देश भर की यूनिवर्सिटी में अंडरग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश मिलता है।

यह परीक्षा चीन का शिक्षा मंत्रालय आयोजित कराता है। जानकारों का कहना है कि गाओकाओ ने वहां के उच्च शिक्षण संस्थानों को बेहतरीन छात्र दिए हैं और आर्थिक विकास और तकनीकी इनोवेशन के लिए बड़ी संख्या में पेशेवर भी तैयार किए हैं। लेकिन इतनी बड़ी परीक्षा के लिए चीन की तैयारी बहुत जबरदस्त तरीके से होती है। इसमें सबसे अहम है परीक्षा को किसी गड़बड़ी से दूर रखना। साथ ही नकल रोकने के लिए कड़ी व्यवस्था की गई हैं।

नकल रोकने के लिए चीन का प्लान

परीक्षा केंद्र में AI-पावर्ड मॉनिटरिंग सिस्टम और स्मार्ट सिक्योरिटी स्क्रीनिंग गेट जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल, छात्रों के मोबाइल फोन लेकर जाने और स्मार्ट वॉच पहनने पर रोक, छात्रों के स्मार्ट ग्लास पहनने और वायरलेस कम्युनिकेशन डिवाइस पर रोक, छिपे हुए डिवाइस का पता लगाने के लिए हाईटेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल, नकली फिंगरप्रिंट का पता लगाने के लिए फेशियल रिकग्निशन और ड्रोन से हाई टेक निगरानी जैसी व्यवस्थाएं की गई है।

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क्या चीन की गाओकाओ पूरी तरह लीक-प्रूफ?

कई लोग इसे लीक-प्रूफ मानते हैं। हालांकि, चीन की सुप्रीम पीपुल्स कोर्ट के डेटा से पता चलता है कि यह परीक्षा लीक-प्रूफ नहीं है। क्योंकि हर साल हजारों लोगों को इस परीक्षा में नकल के लिए सजा दी जाती है। इस डेटा के अनुसार, नवम्बर 2015 से अप्रैल 2024 के बीच 11000 से ज्यादा लोगों को संगठित नकल कराने, पेपर के जवाब बेचने या दूसरों की जगह परीक्षा देने के लिए सजा सुनाई गई है। इसके अलावा साल 2020 में एक टीचर को गाओकाओ परीक्षा में नकल का रैकेट चलाने के लिए 4 साल की सजा दी गई थी।

चीन में नकल के लिए क्या है सजा?

गाओकाओ परीक्षा में किसी भी तरह की धांधली या नकल का इंतजाम करने, टेस्ट के स्वाल या जवाब लीक करने या एग्जाम के लिए वायरलेस डिवास बेचने के लिए 3 से 7 साल की सजा का प्रावधान है। हांलाकि यह सजा भारत में दी जाने वाली सजा के बराबर ही है। इसके अलावा चीन में छात्रों को छोटी-मोटी नकल पर भी जेल हो सकती है और साथ ही एक से तीन साल तक किसी भी सरकारी शिक्षा की परीक्षा में बैठने नहीं दिया जा सकता है।

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