नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह (AAP leader Sanjay Singh) ने मंगलवार को राज्यसभा सचिवालय (Rajya Sabha Chairman) में शपथ ली। जनवरी में संजय सिंह (Sanjay Singh) को उनकी पार्टी ने दोबारा से राज्यसभा के लिए नामित किया था। लेकिन तकनीकी कारणों की वजह से उनकी शपथ टल रही थी। संजय सिंह (Sanjay Singh) अभी जेल में हैं और कोर्ट की परमिशन लेकर आज शपथ लेने पहुंचे थे। राज्यसभा के सभापति उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Rajya Sabha Chairman Vice President Jagdeep Dhankhar) ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
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Vice-President of India and Chairman, Rajya Sabha, #JagdeepDhankhar administered oath to re-elected Member of Rajya Sabha, Sanjay Singh in Parliament House today.#RajyaSabha @VPIndia @SanjayAzadSln pic.twitter.com/T3g2wOGRIJ
— SansadTV (@sansad_tv) March 19, 2024
दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में आरोपी आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह (AAP leader Sanjay Singh) को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए 19 मार्च को संसद में पेश होने की अनुमति कोर्ट की ओर से दी गई। सिंह को हाल ही में दूसरे कार्यकाल के लिए राज्यसभा के लिए चुना गया था। लेकिन उन्हें शपथ नहीं दिलवाई गई थी।
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#WATCH | Rajya Sabha Chairman #JagdeepDhankhar administers Oath/Affirmation to the re- elected Member Sanjay Singh in the Parliament House. #RajyaSabha @VPIndia @harivansh1956 @SanjayAzadSln pic.twitter.com/h6853HzJ6Y
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विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल ने 16 मार्च के आदेश में तिहाड़ जेल अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि आरोपी को पर्याप्त सुरक्षा के तहत संसद ले जाया जाए और उसे अपने फोन का उपयोग करने या अन्य आरोपी व्यक्तियों से बात करने की अनुमति न दी जाए। अदालत ने इस अवसर पर उनके वकील और परिवार के सदस्यों से मिलने की इजाजत प्रदान कर दी।
सिंह को चार अक्टूबर, 2023 को उनके नॉर्थ एवेन्यू स्थित घर पर 10 घंटे की तलाशी के बाद गिरफ्तार किया गया था। पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया और पार्टी के संचार प्रभारी विजय नायर के बाद वह इस मामले में गिरफ्तार होने वाले तीसरे आप नेता हैं।
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ईडी ने आरोप लगाया कि एक आरोपी व्यवसायी दिनेश अरोड़ा, जो बाद में उत्पाद शुल्क मामले में सरकारी गवाह बन गया ने सिंह को दो करोड़ रुपये नकद दिए थे। यह भी आरोप लगाया गया कि सिंह ने कुछ व्यवसायियों को फायदा पहुंचाने के लिए सिसौदिया के माध्यम से शराब नीति में बदलाव सुनिश्चित किया था।