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Ajit Pawar: ‘दादा’ के नाम से लोकप्रिय रहे अजित पवार बारामती में रहे अजेय, छह बार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम बने

By शिव मौर्या 
Updated Date

Ajit Pawar: महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता रहे अजित पवार की बुधवार विमान दुर्घटना में जान चली गयी। दुर्घटना के दौरान विमान में अजित पवार समेत कुल 5 लोग सवार थे, जिनकी जान चली गई है। इनमें उनके एक पीएसओ, एक सहायक और दो क्रू मेंबर शामिल थे। इस हादसे के बाद पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर है। महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार का एक अपना अलग कद था और वो 6 बार विभिन्न मुख्यमंत्रियों के साथ डिप्टी सीएम रहे हैं।

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अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में हुआ। वह एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं। उनके पिता वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम करते थे। अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के राजनीतिक नक्शेकदम पर चलते हुए राजनीति में प्रवेश किया। जनता के बीच वो काफी सक्रिय रहे और हर किसी के साथ खडे दिखते थे। जनता और समर्थकों के बीच अजित पवार ‘दादा’ के नाम से लोकप्रिय थे।

1991 से लगातार सात बार विधायक चुने गए
अजित पवार बारामती विधानसभा से 1991 से लगातार सात बार विधायक चुने गए। हर चुनाव में उन्होंने बड़ी जीत हासिल की। उनका आधार सहकारी क्षेत्र में मजबूत था-16 साल तक पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहे, चीनी मिलों और दूध संघों पर गहरा प्रभाव। विभिन्न मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में जल संसाधन, बिजली, ग्रामीण विकास जैसे प्रमुख विभाग संभाले।

सीएम फडणवीस के साथ बनाई 80 घंटे की सरकार
अजित पवार राजनीतिक सफर साहसिक रहा है। नवंबर 2019 में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ सरकार बनायी थी लेकिन ये सरकार महज 80 घंटे तक चली। इसके बाद वो शरद पवार के साथ चले गए थे और सरकार गिर गयी थी। जुलाई 2023 में NCP में विभाजन कर शिंदे सरकार में शामिल हुए, जिसने शरद पवार के 25 साल के नेतृत्व को चुनौती दी।

करियर विवादों से भी भरा रहा
अजित पवार का राजनीतिक करियर विवादों से भी भरा रहा। जैसे 70,000 करोड़ का सिंचाई घोटाला और महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक मामले, लेकिन उन्होंने आरोपों से इनकार किया और कई क्लीन चिट मिलीं। दिग्गज नेता शरद पवार के भतीजे होने के बावजूद परिवार में फूट पड़ी, लेकिन 2026 की रिपोर्ट्स में स्थानीय चुनावों के लिए दोनों NCP गुटों में रणनीतिक गठबंधन या “दोस्ताना मुकाबला” की संभावना जताई गई थी।

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