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अखिलेश यादव ,बोले-मुजफ्फरनगर पुलिस का फरमान सामाजिक अपराध,कोर्ट स्वत: संज्ञान ले और करे कार्रवाई

By santosh singh 
Updated Date

मुजफ्फरनगर। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने मुजफ्फरनगर पुलिस (Muzaffarnagar Police) द्वारा जारी किए गए आदेश को सामाजिक अपराध बताया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट को ऐसे मामलों का स्वत: संज्ञान लेना चाहिए और जांच करवाकर दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।

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मुजफ्फरनगर पुलिस (Muzaffarnagar Police) ने कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) को लेकर जारी किए गए फरमान में कहा है कि सभी दुकानदार दुकान के बाहर अपना नाम जरूर लिखें। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा कि ऐसे आदेश सौहार्द के शांतिपूर्ण वातावरण को बिगाड़ना चाहते हैं।

उन्होंने सोशल साइट एक्स पर कहा कि … और जिसका नाम गुड्डू, मुन्ना, छोटू या फत्ते है, उसके नाम से क्या पता चलेगा? माननीय न्यायालय स्वत: संज्ञान ले और ऐसे प्रशासन के पीछे के शासन तक की मंशा की जांच करवाकर, उचित दंडात्मक कार्रवाई करे। ऐसे आदेश सामाजिक अपराध हैं, जो सौहार्द के शांतिपूर्ण वातावरण को बिगाड़ना चाहते हैं। प्रदेश में कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra)  शुरू होने वाली है। इसे लेकर प्रशासन ने खास तैयारियां की हैं।

बता दें कि मुजफ्फरनगर पुलिस (Muzaffarnagar Police) ने गुरुवार को अपने एक्स पोस्ट पर लिखा है कि श्रावण कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra)  के दौरान समीपवर्ती राज्यों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश होते हुए भारी संख्या में कांवड़िये हरिद्वार से जल उठाकर मुजफ्फरनगर जनपद से होकर गुजरते हैं। श्रावण के पवित्र माह में कई लोग ख़ासकर कांवड़िये अपने खानपान में कुछ खाद्य सामग्री से परहेज़ करते हैं। पूर्व मे ऐसे दृष्टान्त प्रकाश मे आये हैं जहां कांवड़ मार्ग पर हर प्रकार की खाद्य सामग्री बेचने वाले कुछ दुकानदारों द्वारा अपनी दुकानों के नाम इस प्रकार से रखे गए जिससे कांवड़ियो मे भ्रम की स्थिति उत्पन्न होकर कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई।

इस प्रकार की पुनरावृत्ति रोकने एवं श्रद्धालुओं की आस्था के दृष्टिगत कांवड़ मार्ग पर पड़ने वाले होटल, ढाबे एवं खानपान की सामग्री बेचने वाले दुकानदारों से अनुरोध किया गया है कि वे स्वेच्छा से अपने मालिक और काम करने वालों का नाम प्रदर्शित करें। इस आदेश का आशय किसी प्रकार का धार्मिक विभेद ना होकर सिर्फ मुजफ्फरनगर जनपद (Muzaffarnagar District) से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, आरोप प्रत्यारोप एवं कानून व्यवस्था की स्थिति को बचाना है। यह व्यवस्था पूर्व मे भी प्रचलित रही है।

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