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CJP प्रोटेस्ट के बीच सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, इंटरनेट बहाली-बंद स्टेशनों पर मांगा जवाब

By अनूप कुमार 
Updated Date

Supreme Court CJP Protest :  CJP प्रोटेस्ट से जुड़ी याचिकाएं पर रविवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। दिल्ली में 10 अक्तूबर को हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की हिरासत, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध से जुड़े मामलों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई। जस्टिस जोयमाल्या बागची (Justice Joymalya Bagchi) और जस्टिस वी. मोहना (Justice V. Mohana) की बेंच ने सुनवाई की और केंद्र सरकार को अंतरिम आदेश जारी किया कि जहां कानून व्यवस्था (Law and order) को नुकसान पहुंचने की आशंका है, सिर्फ वहां बैरिकेड लगाए जाएं, बाकी सब जगहों से बैरिकेड हटाए जाए, ताकि आम लोगों को आवाजाही (Movement)  में समस्या न हो। मेट्रो और ट्रेनों को भी सुचारू रूप से चलाया जाए। इंटरनेट सर्विस को भी बहाल किया जाएगा। मामले में अगली सुनवाई अब मंगलवार को होगी।

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अदालत ने संबंधित अधिकारियों से बंद किए गए मेट्रो स्टेशनों का विवरण और उनकी भौगोलिक स्थिति दर्शाने वाला नक्शा पेश करने को कहा। पीठ का कहना था कि इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि प्रतिबंधों का लोगों की आवाजाही और सार्वजनिक परिवहन  (Public transport)  तक पहुंच पर क्या प्रभाव पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना (Contempt) की याचिका और अवैध हिरासत (Illegal detention) का मामला सुनते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और निर्देश दिया कि केंद्र सरकार हलफनामा दायर करे और बताए कि क्यों न केंद्र के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई (Contempt proceedings) की जाए? क्या एक ही जगह के सभी मेट्रो स्टेशन बंद किए गए थे? सुप्रीम कोर्ट Supreme Court ने दिल्ली पुलिस को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ट्रेनें-मेट्रो बंद कराने से जुड़े अधिकारियों को भी नोटिस भेजे हैं। Supreme Court ने कहा कि मारे आदेश का उल्लंघन किया गया है। करीब 7000 लोगों को अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया। इंटरनेट सड़कों, मेट्रो स्टेशन और ट्रेनों की आवाजाही बंद की गई, लेकिन दिल्ली पुलिस न बैरिकेडिंग कर सकती है, न Internet को बंद कर सकती है।

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