नई दिल्ली। भारत के पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल सेवानिवृत्त एमएम नरवणे (former Army Chief General Naravane) ने पाकिस्तान की कूटनीतिक चालों पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान (Pakistan) कोई मध्यस्थ नहीं, बल्कि सिर्फ एक कूरियर सेवा बनकर रह गया है। दरअसल, पाकिस्तान (Pakistan) लंबे समय से खुद को इस संघर्ष में एक शांतिदूत के रूप में पेश करने की नाकाम कोशिश कर रहा है। कुछ महीने पहले उसने दोनों देशों के बीच बातचीत कराने का दावा भी किया था, जिस पर पूर्व भारतीय सेना प्रमुख ने पानी फेर दिया।
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आर्थिक सुरक्षा ही असली राष्ट्रीय सुरक्षा है : नरवणे
जनरल नरवणे (General Naravane) ने वैश्विक संघर्षों का विश्लेषण करते हुए अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के अंतर्संबंधों को समझाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सीधे तौर पर आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी होती है। असल में, अर्थव्यवस्था ही दुनिया की हर चीज को चलाती है। पूर्व सैन्य प्रमुख के मुताबिक, भारत का प्रयास हमेशा वैश्विक व्यापार के दायरे में रहते हुए आत्मनिर्भर बनने का रहा है। दुनिया में होने वाले किसी भी बड़े संकट के झटकों से हम खुद को पूरी तरह अलग नहीं रख सकते। यही वजह है कि भारत अब अपने आपूर्ति स्रोतों में विविधता ला रहा है। घरेलू उत्पादन को लगातार मजबूत किया जा रहा है जिससे भविष्य के किसी भी वैश्विक झटके से देश को सुरक्षित रखा जा सके। दुनिया हमेशा से परिवर्तनशील रही है और भारत अपनी प्राथमिकताओं को अच्छी तरह समझता है।
सेना का आधुनिकीकरण और ड्रोन का बढ़ता दम
भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण को लेकर उन्होंने कहा कि सेना, नौसेना और वायुसेना को आधुनिक बनाना कभी न खत्म होने वाला काम है। अब भारत का पूरा ध्यान स्वदेशी उपकरणों की खरीद पर है। यूक्रेन से लेकर अमेरिका-ईरान के मौजूदा संघर्ष तक, हाल के युद्धों ने ड्रोन और मानव रहित विमानों की रणनीतिक ताकत को साबित किया है। इसी अनुभव से सीखते हुए भारतीय सेना ने ड्रोन की खरीद काफी बढ़ा दी है। इस क्षेत्र में भारत की घरेलू कंपनियों और एमएसएमई की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होने वाली है, जो बड़े पैमाने पर स्वदेशी ड्रोन का निर्माण कर रही हैं।
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बांग्लादेश से रिश्ते और सीमा पर सुगबुगाहट
पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ संबंधों पर पूर्व सेना प्रमुख ने पूरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि दो देशों के रिश्तों में उतार-चढ़ाव आना बेहद स्वाभाविक है। किसी गिरावट को हमेशा नकारात्मक रूप से नहीं देखना चाहिए। उतार के बाद अक्सर रिश्तों में सुधार आता है और भारत-बांग्लादेश के संबंध फिर से मजबूती की तरफ बढ़ रहे हैं। वहीं, भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के काम पर उन्होंने कहा कि यह परियोजना पिछले एक दशक से अधिक समय से चल रही है। नदी तटीय इलाका होने के कारण इस सीमा पर बाड़ लगाना हमेशा से एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण काम रहा है। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच बचे हुए हिस्सों को अब तेजी से कवर किया जा रहा है ताकि पूरी सीमा को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके।