नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अरावली पर्वतमाला (Aravalli Mountain Range) में अवैध खनन (Illegal Mining) को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि इससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए अदालत ने अरावली क्षेत्र में खनन और उससे जुड़े सभी पहलुओं की व्यापक जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का फैसला किया है।
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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Suryakant) और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची व न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि अरावली जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अवैध खनन केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी गंभीर खतरा है। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और एमिकस क्यूरी के. परमेश्वर को निर्देश दिए हैं कि वे चार सप्ताह के भीतर खनन से संबंधित मामलों में विशेषज्ञता रखने वाले पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों के नाम सुझाएं, ताकि एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया जा सके। यह समिति सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की निगरानी और मार्गदर्शन में कार्य करेगी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि अरावली क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में अवैध खनन की गतिविधियां सामने आ रही हैं। इस पर राजस्थान सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने अदालत को आश्वस्त किया कि राज्य में किसी भी तरह का अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अरावली पहाड़ियों (Aravalli Mountain Range) और श्रेणियों की एक समान परिभाषा को लेकर 20 नवंबर को दिए गए अपने आदेश को फिलहाल स्थगित रखने का निर्णय भी बरकरार रखा है। अदालत ने इससे पहले कहा था कि नई परिभाषा में कुछ गंभीर अस्पष्टताएं हैं, जिनका समाधान किया जाना आवश्यक है।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 20 नवंबर को दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैली अरावली पर्वतमाला में नई खनन लीज जारी करने पर रोक लगा दी थी। यह रोक विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक लागू की गई थी। यह निर्णय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) की समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया था, जिसका उद्देश्य दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक अरावली का संरक्षण करना है। अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा गठित की जाने वाली विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही अरावली क्षेत्र में खनन और संरक्षण से जुड़े आगे के निर्णय लिए जाएंगे।