1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. UGC Regulations 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और यूजीसी से जवाब मांगा, अगले आदेश तक 2012 वाले नियम लागू

UGC Regulations 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और यूजीसी से जवाब मांगा, अगले आदेश तक 2012 वाले नियम लागू

UGC Regulations 2026 : यूजीसी (UGC)  के नए नियमों के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में रोक लगी दी है। इस मामले पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत (Chief Justice Suryakant) ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए। इसी के साथ पीठ ने केंद्र और यूजीसी (UGC)  को नोटिस जारी किया है।

By santosh singh 
Updated Date

UGC Regulations 2026 : यूजीसी (UGC)  के नए नियमों के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में रोक लगी दी है। इस मामले पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत (Chief Justice Suryakant) ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए। इसी के साथ पीठ ने केंद्र और यूजीसी (UGC)  को नोटिस जारी किया है।

पढ़ें :- राजा रघुवंशी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने यूजीसी विनियम, 2026 (UGC Regulations 2026) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट में इन विनियमों को सामान्य वर्गों के विरुद्ध भेदभावपूर्ण होने के आधार पर चुनौती दी गई है। ऐसे में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगी दी। अब नए आदेश तक 2012 के नियम ही लागू रहेंगे।

केंद्र को नोटिस जारी, 19 मार्च को अगली सुनवाई

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि नए नियम अस्पष्ट हैं। कोर्ट के कहा कि नए यूजीसी नियमों का दुरुपयोग हो सकता है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और यूजीसी (UGC)  के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
विज्ञापन

केंद्र और यूजीसी से जवाब मांगा

पढ़ें :- आसाराम को 'सुप्रीम' झटका, कोर्ट ने कहा केवल उम्र या बीमारी के आधार पर फिलहाल नहीं दी जा सकती जमानत

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Suryakant) और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची (Justice Joymalya Bagchi) की पीठ ने इन रिट याचिकाओं की सुनवाई की। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Suryakant) ने कहा कि हमें जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए या हम पीछे जा रह हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि क्या हम उल्टी दिशा में जा रहे। जिन्हें सुरक्षा चाहिए, उनके लिए व्यवस्था होनी चाहिए। इसी के साथ उन्होंने केंद्र और यूजीसी (UGC)  से जवाब मांगा है। साथ ही कहा है कि एक विशेष कमेटी भी बनाई जा सकती है। इसी के साथ नए नियमों की भाषा को स्पष्ट करने के लिए विशेषज्ञों की जरूरत पर भी जोर दिया।

याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने बताई अपनी दलीलें

वहीं याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने कहा कि आज, सीजेआई ने हमारी दलीलों की सराहना की। हमें कहना होगा कि यह हमारे लिए बहुत बड़ी जीत है। जैसा कि हम खास तौर पर तीन मुद्दों के बारे में बात कर रहे थे, एक है सेक्शन 3C जो जातिगत भेदभाव के बारे में बात करता है और उस खास सेक्शन में, सामान्य जाति को बाहर रखा गया है और बाकी सभी जातियों को शामिल किया गया है। तो, यह खास सेक्शन यह संदेश दे रहा है कि SC, ST और OBC के साथ सामान्य जाति द्वारा भेदभाव किया जा रहा है।’

उन्होंने आगे कहा कि यह सीजेआई के सामने हमारी दलील थी और उन्होंने हमारी दलील की सराहना की और खास तौर पर कहा कि हम जो कह रहे हैं वह सही है और अगर ऐसे सेक्शन हैं, तो यह निश्चित रूप से सामान्य जाति के लिए बहुत कठोर और भेदभावपूर्ण होगा और इसमें संशोधन किया जाना चाहिए। दूसरा हिस्सा इक्विटी कमेटी के संबंध में है जो इन नए UGC सेक्शन के सेक्शन 18 के तहत बनाई गई है। इन खास नियमों में सामान्य समुदाय के लिए कोई खास प्रतिनिधित्व नहीं बताया गया है। CJI ने भी हमारी इस दलील को माना और सुझाव दिया कि एक खास कमेटी बनाई जानी चाहिए, जिसमें शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हों, जिन्हें इस खास विषय का ज्ञान हो और अब यह मामला 19 मार्च के लिए सूचीबद्ध है और उम्मीद है कि कुछ अच्छा होगा।

यूजीसी के नए नियमों से देशभर में आक्रोश

पढ़ें :- जयराम रमेश ने पीएम मोदी को घेरा, बोले-पाकिस्तान को अब वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर भारत से ज्यादा अहमियत, हमारे 'विश्व गुरु' का क्या हुआ?

दरअसल, यूजीसी रेगुलेशन, 2026 (UGC Regulations 2026) को 23 जनवरी, 2026 को नोटिफाई किया गया था। जिसे लेकर पूरे देश में आक्रोश फैल गया। जिसके बाद इसे कई याचिकाकर्ताओं ने मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान के साथ-साथ यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन एक्ट, 1956 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी। यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन (UGC Equity Regulations) के खिलाफ याचिकाएं मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान ने दायर की हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ये नियम सामान्य वर्गों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...