सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन को रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने इस चुनावी प्रक्रिया के अंतरिम चरण (Interim phase) में हस्तक्षेप करने से साफ मना कर दिया है। न्यायाधीशों की पीठ ने साफ किया है कि एक बार नामांकन खारिज होने के बाद, इसका उचित कानूनी उपाय केवल एक चुनाव याचिका (Election Petition) के माध्यम से ही संभव हो सकता है।
SC setback for Congress: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन को रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने इस चुनावी प्रक्रिया के अंतरिम चरण (Interim phase) में हस्तक्षेप करने से साफ मना कर दिया है। न्यायाधीशों की पीठ ने साफ किया है कि एक बार नामांकन खारिज होने के बाद, इसका उचित कानूनी उपाय केवल एक चुनाव याचिका (Election Petition) के माध्यम से ही संभव हो सकता है।
नामांकन खारिज होने का कारण
मध्य प्रदेश से कांग्रेस की एकमात्र राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का पर्चा चुनाव अधिकारी अरविंद शर्मा ने रद्द कर दिया था। क्योंकि उन पर चुनावी हलफनामे (Election affidavits) में तेलंगाना के एक लंबित कानूनी मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था। इसकी शिकायत बीजेपी प्रत्याशी महेश केवट ने की थी। हांलाकि, मीनाक्षी नटराजन की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता (senior counsel) अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में दलील दी कि Under the Representation of the People Act, केवल उन मामलों का खुलासा करना जरूरी है जिनमें न्यूनतम दो वर्ष की सजा का प्रावधान हो या कोर्ट ने संज्ञान (Cognizance) लिया हो। नटराजन को केवल एक नोटिस मिला था और कोर्ट ने इस विषय पर संज्ञान भी नहीं लिया था। इसलिए यह कोई आपराधिक मामला नहीं बनता था।
अदालत ने याचिका की विचारणीयता (Maintainability) पर सवाल उठाते हुए कहा कि फैसला सही हो या गलत, एक चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालत इस स्तर पर दखल नहीं देता है। अदालत के इस फैसले के बाद कांग्रेस मैदान से बाहर हो चुकी है। अब मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है।