छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित एक विशेष विदेशी एक्सपो और बुनकर सम्मेलन में एक बेहद अलग और भावुक कर देने वाला नजारा देखने को मिला। कभी बस्तर के घने और खतरनाक जंगलों में हाथों में बंदूक उठाकर नक्सली हिंसा (Naxalite violence) का रास्ता चुनने वाली एक पूर्व महिला नक्सली (Former female Naxalite) ने इस कार्यक्रम में रैंप वॉक किया।
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित एक विशेष विदेशी एक्सपो और बुनकर सम्मेलन में एक बेहद अलग और भावुक कर देने वाला नजारा देखने को मिला। कभी बस्तर के घने और खतरनाक जंगलों में हाथों में बंदूक उठाकर नक्सली हिंसा (Naxalite violence) का रास्ता चुनने वाली एक पूर्व महिला नक्सली (Former female Naxalite) ने इस कार्यक्रम में रैंप वॉक किया।
माओवादी विचारधारा (Maoist Ideology) और हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापस लौटी इस महिला ने जब छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पारंपरिक ‘कोसा सिल्क’ (Kosa Silk) की बेहद खूबसूरत साड़ी पहनकर मंच पर कदम रखा, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनका यह रैंप वॉक सिर्फ फैशन या मॉडलिंग का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह उनके जीवन में आए एक बहुत बड़े बदलाव और एक नई शुरुआत का प्रतीक था।
हिंसा के अंधेरे से सम्मान की रोशनी तक का सफर एक समय ऐसा था जब यह महिला बस्तर के जंगलों में नक्सली संगठनों के साथ काम करती थी और उसका जीवन हमेशा डर, संघर्ष और हिंसा के बीच बीतता था। लेकिन सरकार की सरेंडर (आत्मसमर्पण) और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उसने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला किया।
आत्मसमर्पण करने के बाद, उसने न केवल बंदूकें छोड़ीं, बल्कि अपने जीवन को एक सही दिशा देने का प्रयास भी शुरू किया। आज वहीं महिलाएं रायपुर के इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक्सपो और बुनकर सम्मेलन में एक नया इतिहास रच दिया।
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक ‘कोसा सिल्क’ की ब्रांडिंग
इस एक्सपो का मुख्य उद्देश्य राज्य के स्थानीय बुनकरों, हस्तशिल्प और विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध ‘कोसा सिल्क’ (Kosa Silk) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना था। इस सम्मेलन में देश-विदेश के कई बड़े व्यापारी, कपड़ा विशेषज्ञ और खरीदार शामिल हुए थे। जब इस पूर्व महिला नक्सली ने पारंपरिक कोसा सिल्क की साड़ी पहनकर आत्मविश्वास के साथ रैंप पर वॉक किया, तो वहां मौजूद हर कोई हैरान और प्रभावित रह गया। उन्होंने दिखाया कि बस्तर की कला, संस्कृति और यहां का कपड़ा कितना समृद्ध है।
बदलाव और उम्मीद का बड़ा संदेश
कार्यक्रम में मौजूद लोगों और अधिकारियों ने इस पहल की जमकर तारीफ की। यह घटना यह संदेश देती है कि अगर किसी को सही अवसर और सम्मान मिले, तो व्यक्ति अपना पूरा जीवन बदल सकता है।
यह रैंप वॉक उन सभी भटक चुके युवाओं के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा है जो आज भी हिंसा के रास्ते पर हैं। यह दिखाता है कि बंदूक छोड़ने के बाद जीवन खत्म नहीं होता, बल्कि समाज में सम्मान और तरक्की के नए रास्ते खुलते हैं। आज वह पूर्व महिला नक्सली बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए बदलाव और शांति की एक नई मिसाल बन चुकी है। बस्तर के जंगलों से रायपुर के फैशन स्टेज तक का उनका यह सफर वाकई अद्भुत और प्रेरणादायक है।
रिपोर्ट: दीपांजली मिश्रा