नई दिल्ली। भारतीय जन संचार संस्थान (Indian Institute of Mass Communication) ने दिल्ली हाई कोर्ट में हिंदी-उर्दू विवाद के बीच एक बड़े घटनाक्रम में अपना आधिकारिक जवाब दाखिल कर दिया है। इस संस्थान ने प्रवेश परीक्षाओं की लिपि निर्धारित करने के अपने अधिकार का जोरदार बचाव किया है। शैक्षणिक स्वतंत्रता
