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बलूचिस्तान ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को लिखा ओपन लेटर, ‘पाकिस्तान को उखाड़ फेंको, हम भारत के साथ’

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। बलूचिस्तान (Balochistan) के नेता मीर यार बलूच (Meer Yar Baloch) ने पाकिस्तान सरकार (Pakistan Government) को खुली चुनौती देते हुए भारत का सीधे तौर पर समर्थन किया है। मीर यार बलूच (Meer Yar Baloch) ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर (India’s Foreign Minister S Jaishankar) को पत्र लिखकर पाकिस्तान से जुड़ी अंदरूनी जानकारी साझा की है। बलूच नेता ने अपने पत्र में पाकिस्तान (Pakistan) और चीन (China) के प्लान का भी खुलासा किया है।

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भारत को बलूचिस्तान से आई चिट्ठी

मीर यार बलूच (Meer Yar Baloch) ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र में दावा किया कि चीन आने वाले समय में पाकिस्तान में अपनी सेना तैनात कर सकता है। बलूच नेता ने इस्लामाबाद और बीजिंग के बीच चल रही इस साझेदारी को भारत के लिए काफी खतरनाक बताया। बलूच नेता ने भारत के विदेश मंत्री को लिखा यह पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी शेयर किया।

पाकिस्तान को उखाड़ फेंको

मीर यार बलूच (Meer Yar Baloch) ने एस जयशंकर को लिखा कि बलूचिस्तान के लोग पिछले 79 सालों से आतंकवाद और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन को झेल रहे हैं। बलूच नेता ने लिखा कि अब समय आ गया है कि इस गंभीर समस्या को जड़ से उखाड़ फेंका जाए, ताकि बलूचिस्तान के लोगों के लिए स्थायी शांति और संप्रभुता सुनिश्चित हो सके।

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बलूचिस्तान में तैनात होगी चीनी सेना

बलूच नेता ने यह भी लिखा कि बलूचिस्तान गणराज्य पाकिस्तान (Republic of Balochistan, Pakistan) और चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक गठबंधन को काफी खतरनाक मानता है। हम चेतावनी देते हैं कि चीन ने पाकिस्तान के सहयोग से चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को उसके अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। मीर यार बलूच (Meer Yar Baloch) ने दावा किया कि ‘यहां जब तक बलूच प्रतिरोध और रक्षा बलों को मजबूत नहीं किया जाएगा और बलूच के लोगों को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा, तब आने वाले समय में इस क्षेत्र में जल्द ही चीन की सेना देखने को मिल सकती है।

पाकिस्तान-चीन ने सीपीईसी के तहत सैन्य विस्तार के ऐसे आरोपों को बार-बार खारिज किया

देखा जाए तो पाकिस्तान और चीन ने सीपीईसी (CPEC)  के तहत सैन्य विस्तार के ऐसे आरोपों को बार-बार खारिज किया है। चीन-पाकिस्तान का कहना है कि यह परियोजना आर्थिक प्रकृति के लिए है। हालांकि, भारत लगातार सीपीईसी (CPEC)  का विरोध करता रहा है, यह कहते हुए कि यह जगह पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर से होकर गुजरती है, जो सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा करती है।

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