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ग्राहकों को नकली पनीर खिलाया, उसका खामियाजा खुद भुगतें: उडुपी स्वाद रेस्टोरेंट को HC ने राहत नहीं दी

By Harsh 
Updated Date

मुंबई।  ठाणे के रेस्टोरेंट उडुपी स्वाद को बॉम्बे हाईकोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने रेस्टोरेंट का लाइसेंस निलंबित कर दिया था। आरोप है कि यहां प्रतिबंधित अनालॉग पनीर ग्राहकों को परोसा जा रहा था। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए रेस्टोरेंट प्रबंधन हाईकोर्ट पहुंचा था।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की पीठ ने रेस्टोरेंट की याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस तरह प्रतिष्ठान ने ग्राहकों को ऐसा भोजन परोसकर परेशानी में डाला, अब उसे भी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

‘ग्राहकों को पता होना चाहिए कि उन्हें क्या खिलाया जा रहा है’

सुनवाई के दौरान अदालत ने रेस्टोरेंट प्रबंधन से पूछा कि क्या उसके मेन्यू में यह साफ तौर पर बताया गया था कि ग्राहकों को दिया जा रहा पनीर दूध से तैयार नहीं है, बल्कि अनालॉग पनीर है। पीठ ने कहा कि अगर ग्राहक पनीर मांगता है तो उसे किसी दूसरी चीज को पनीर बताकर नहीं परोसा जा सकता।

अदालत ने रेस्टोरेंट की इस दलील पर भी सवाल उठाया कि FDA को लाइसेंस निलंबित करने से पहले सुधार नोटिस देना चाहिए था। पीठ ने कहा कि ग्राहकों को यह जानने का अधिकार है कि उनकी प्लेट में आखिर क्या परोसा जा रहा है। अदालत ने प्रभावित ग्राहकों को उपभोक्ता फोरम का रुख कर मुआवजे की मांग करने की बात भी कही।

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रेस्टोरेंट ने कहा- आगे नहीं इस्तेमाल करेंगे अनालॉग पनीर

रेस्टोरेंट की ओर से अदालत में भरोसा दिलाया गया कि भविष्य में अनालॉग पनीर का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। हालांकि कोर्ट ने इस आश्वासन के आधार पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। महाराष्ट्र सरकार ने जनस्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन को देखते हुए अनालॉग पनीर के निर्माण और बिक्री पर एक साल के लिए रोक लगाई है।

असली पनीर से कैसे अलग है अनालॉग पनीर?

अनालॉग पनीर में दूध के फैट की जगह वनस्पति तेल का इस्तेमाल किया जाता है। इसे तैयार करने में स्टार्च, इमल्सीफायर और दूसरे पदार्थ भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। यह सामान्य पनीर के मुकाबले सस्ता पड़ता है और इसमें प्रोटीन की मात्रा भी कम होती है।

नियमों के मुताबिक असुरक्षित भोजन से किसी व्यक्ति की मौत होने की स्थिति में गंभीर सजा का प्रावधान है। इसमें आजीवन कारावास के साथ कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।

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7 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

FDA ने 11 अगस्त को रेस्टोरेंट का लाइसेंस निलंबित करने का आदेश जारी किया था। इस फैसले के खिलाफ प्रबंधन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। अब अदालत ने FDA को अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।

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