Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. एस्ट्रोलोजी
  3. Chaitra Navratri 2025 2nd Day : नवरात्रि के दूसरे दिन देवी मां को अर्पित करें ये वस्तुएं , सभी मनोकामनाएं होती है पूरी

Chaitra Navratri 2025 2nd Day : नवरात्रि के दूसरे दिन देवी मां को अर्पित करें ये वस्तुएं , सभी मनोकामनाएं होती है पूरी

By अनूप कुमार 
Updated Date

Chaitra Navratri 2025 : मां दुर्गा की उपासना का पर्व  चैत्र नवरात्रि का आज दूसरा दिन है। चैत्र शुक्ल पक्ष की उदया तिथि द्वितीया और सोमवार का दिन है। द्वितीया तिथि आज सुबह 9 बजकर 12 मिनट तक रहेगी, उसके बाद तृतीया तिथि लग जाएगी। आज चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी और चंद्रघंटा दोनों ही स्वरूप की पूजा की जाएगी। इस दिन देवी मां के इन स्वरूपों की उपासना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

पढ़ें :- Sawan First Somwar 2026 : फलाहार में घोलें स्वाद और मिठास, बनाएं ये स्वादिष्ट फ्रूट व्यंजन

ब्रह्मचारिणी देवी के भोग और चंद्रघंटा देवी के भोग

मां ब्रह्मचारिणी प्रिय भोग
मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री और पंचामृत का भोग बहुत प्रिय है। ऐसे में मां को पंचामृत बनाकर अर्पित करें। इसके अलावा मां को सफेद मिठाई या फल भी अर्पित कर सकते हैं। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से व्यक्ति के अंदर जप-तप की शक्ति बढ़ती है। मां ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को संदेश देती हैं कि परिश्रम से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है।

मंत्र: ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:
फूल: सफेद कमल और पीले गुलाब की माला अर्पित करें.

चंद्रघंटा देवी के भोग
नवरात्रि के तीसरे दिन, मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी चीजों का भोग लगाना चाहिए। मां चंद्रघंटा के मंत्र का जप किया जाये तो जीवन में आ रही सभी परेशानियों से छुटकारा मिलता है। ये सदैव अपने भक्तों की रक्षा के लिये तैयार रहती हैं। इनके घंटे की ध्वनि के आगे बड़े से बड़ा शत्रु भी नहीं टिक पाता है। लिहाजा देवी चंद्रघंटा हर परिस्थिति में सभी तरह के कष्टों से छुटकारा दिलाने में सहायक है। फूल: सफेद कमल और पीले गुलाब की माला अर्पित करें।
मंत्र: “पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥”

पढ़ें :- Surya Nakshatra Parivartan 2026 :  आज होगा सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन , जानरें किन राशियों का होगा फायदा

फूल:  पीले गुलाब की माला अर्पित करें।
मंत्र: “पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥”

Advertisement