बागपत के चर्चित अंकित-इसरार हत्याकांड में फरार चल रहे मुख्य आरोपी महंत नरेशनाथ को पुलिस ने कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया है। करीब दो महीने से पुलिस की पकड़ से बाहर आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना हुलिया बदल लिया था। वह कोलकाता के एक मंदिर के बाहर भिक्षु बनकर रह रहा था। पुलिस टीम अब उसे बागपत लेकर लौट रही है...
बागपत के चर्चित अंकित-इसरार हत्याकांड में फरार चल रहे मुख्य आरोपी महंत नरेशनाथ को पुलिस ने कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया है। करीब दो महीने से पुलिस की पकड़ से बाहर आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना हुलिया बदल लिया था। वह कोलकाता के एक मंदिर के बाहर भिक्षु बनकर रह रहा था। पुलिस टीम अब उसे बागपत लेकर लौट आई है।
नेपाल से बंगाल तक बदलता रहा ठिकाना
पुलिस के मुताबिक, दोनों दोस्तों की हत्या के बाद नरेशनाथ पहले हरिद्वार जाकर गंगा में डुबकी लगाई फिर वहां से नेपाल चला गया था। वहां बाढ़ की स्थिति बनने के बाद वह भारत लौटा और पश्चिम बंगाल पहुंच गया। कोलकाता में उसने पहचान छिपाने के लिए भिक्षु का रूप अपना लिया।
पुलिस को उसकी तलाश में काफी समय से पश्चिम बंगाल में सुराग मिल रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी ने किसी परिचित से फोन पर संपर्क किया और इसी कॉल से पुलिस को उसकी लोकेशन तक पहुंचने में मदद मिली। इसके बाद टीम ने कार्रवाई कर उसे पकड़ लिया।
तस्वीरों का राज खुला तो रची हत्या की साजिश
पुलिस के मुताबिक, नरेशनाथ का अंकित की बहन से प्रेम संबंध था। अंकित को इसकी जानकारी थी और उसके पास दोनों की तस्वीरें भी थीं। इन्हीं तस्वीरों को लेकर वह नरेशनाथ पर दबाव बना रहा था और पैसों की मांग कर रहा था।पूछताछ में सामने आया कि बदनामी के डर से नरेशनाथ ने अंकित को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। अंकित के साथ मौजूद इसरार भी उसकी चपेट में आ गया। दोनों को चाय में नींद की दवा देने के बाद हत्या कर शव मंदिर परिसर में दफना दिए गए। सबूत छिपाने के लिए ऊपर टाइल्स बिछा दी गई थीं।
मंदिर परिसर में मिले थे दोनों के शव
यह मामला 25 जुलाई को अंकित और उसके दोस्त इसरार के लापता होने के बाद सामने आया था। पुलिस की जांच मंदिर परिसर तक पहुंची और 13 अगस्त को खुदाई के दौरान दोनों के शव बरामद किए गए। पुलिस का आरोप है कि शवों को जमीन में दबाने के बाद ऊपर इंटरलॉकिंग टाइल्स लगा दी गई थीं, ताकि किसी को शक न हो।
जांच में नरेशनाथ का नाम मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आया था। उसके दो कथित सहयोगियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि नरेशनाथ फरार था। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। अब गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे पूछताछ कर हत्याकांड की बाकी कड़ियों को जोड़ने की तैयारी में है।