Chaitra Navratri 2026 : चैत्र नवरात्रि देवी दुर्गा को समर्पित सबसे शुभ हिंदू त्योहारों में से एक है। चैत्र नवरात्र में नौ दिन, पूजा उपासना और साधना के सबसे सर्वोत्तम दिन माने जाते हैं। महाशक्ति की आराधना का पर्व नवरात्र के दौरान देवी दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों- पहला-शैलपुत्री, दूसरा-ब्रह्मचारिणी, तीसरा- चंद्रघंटा, चौथा-कूष्मांडा, पांचवां- स्कंदमाता, छठा-कात्यायनी, सातवां-कालरात्रि, आठवां-महागौरी और नौवां-सिद्धिदात्री देवी की पूजा-अर्चना की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा की संज्ञा दी गई है। नवरात्र के आखिरी दिन कन्याओं को भोजन कराया जाता है।
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आज चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है। मां चंद्रघंटा नवरात्रि का तीसरा स्वरूप हैं, जो साहस, वीरता और शांति की प्रतीक हैं। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण इनका नाम ‘चंद्रघंटा’ पड़ा। ये सिंह पर सवार दस भुजाओं वाली देवी हैं, जो भक्तों को निर्भयता, शक्ति और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति का आशीर्वाद देती हैं, तथा शत्रुओं का नाश करती हैं।
महत्व: देवी चंद्रघंटा का स्वरूप भयानक होने के बावजूद भक्तों के लिए अत्यंत सौम्य और कल्याणकारी है। इनकी आराधना से साधक में साहस और निडरता का संचार होता है।
पूजा विधि और भोग
पूजा विधि: सुबह स्नान के बाद लाल रंग के वस्त्र पहनकर, चौकी पर माता की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा में चंदन, सिंदूर, अक्षत, और गंध से पूजा करें।
भोग: माता को दूध से बनी मिठाइयां, खीर या शहद का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
विशेष उपाय: ऋण मुक्ति के लिए, माता को 108 गुड़हल के फूल अर्पित करने की मान्यता है।
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मंत्र: “ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः” या “पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघंटेति विश्रुता॥” का जाप करें।