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छत्तीसगढ़ डी-माइनिंग ऑपरेशन के दौरान आईईडी ब्लास्ट , DRG के तीन जवान शहीद

By हर्ष गौतम 
Updated Date

कांकेर:  छत्तीसगढ़ के कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा पर डी-माइनिंग ऑपरेशन के दौरान बड़ा हादसा हो गया। नक्सल प्रभावित इलाके में आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) को खोजकर निष्क्रिय करने निकली डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) की टीम अचानक हुए विस्फोट की चपेट में आ गई। इस दर्दनाक हादसे में तीन जवान शहीद हो गए, जबकि एक अन्य जवान घायल हो गया, जिसे बेहतर इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है।

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यह घटना छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के कोरोसकोड़ा इलाके के जंगलों में हुई, जो कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा से लगा संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जवानों की टीम नक्सलियों द्वारा पहले से लगाए गए बारूदी सुरंगों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए अभियान चला रही थी। इसी दौरान अचानक आईईडी में विस्फोट हो गया।

कांकेर एसपी निखिल राखेचा ने बताया कि डी-माइनिंग के दौरान हुए इस ब्लास्ट में इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कॉन्स्टेबल कृष्णा कोमरा और कॉन्स्टेबल संजय गढ़पाले गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं घायल कॉन्स्टेबल परमानंद कोमरा का इलाज जारी है। उन्होंने कहा कि घटना की विस्तृत जांच की जा रही है और आगे और जानकारी साझा की जाएगी।

इस हादसे पर बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने भी गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी कैडरों से मिली जानकारी और अन्य खुफिया इनपुट के आधार पर सुरक्षा बलों ने बस्तर रेंज में सैकड़ों आईईडी बरामद कर उन्हें निष्क्रिय किया है। लेकिन इस बार डी-माइनिंग के दौरान अचानक हुए विस्फोट ने तीन बहादुर जवानों की जान ले ली।

बस्तर के घने जंगलों में नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी सुरक्षाबलों के लिए लंबे समय से सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। कई बार जवान सर्चिंग के दौरान इन विस्फोटकों की चपेट में आ चुके हैं। इतना ही नहीं, स्थानीय ग्रामीण और मवेशी भी इन बारूदी सुरंगों का शिकार बनते रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा अभियान की गंभीर चुनौतियों को सामने ला दिया है।

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