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भारत की अटैकिंग बॉलिंग से घबराए गए थे क्रिस वोक्स, बोले- भगवान का शुक्र है, मुझे 90mph की रफ़्तार वाली बाउंसर का सामना नहीं करना पड़ा

By Abhimanyu 
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Chris Woakes Interview: भारत और इंग्लैंड के बीच हाल ही में खेली गयी एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी 2-2 से ड्रॉ रही, लेकिन सीरीज की आखिरी मैच में जो कुछ हुआ। वह एक सिनेमा से कम नहीं था, जहां एक समय मैच इंग्लैंड के पाले में जाता दिख रहा था, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने अविश्वसनीय वापसी की और मैच को 6 रनों से जीता। इस दौरान कंधे की हड्डी उखड़ने के बावजूद क्रिस वोक्स ने आखिरी दिन बल्लेबाजी करने के लिए उतरकर अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प दिखाया। जिसकी खूब सराहना हुई। हालांकि, वोक्स ने इस बात की खुशी जतायी कि उन्हें कहीं 90mph की रफ़्तार वाली बाउंसर का सामना नहीं करना पड़ा।

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दरअसल, ओवल टेस्ट में क्रिस वोक्स को उस वक्त मैदान पर उतरना पड़ा, जब इंग्लैंड को जीत के लिए 17 रन चाहिए थे और उनकी टीम का सिर्फ एक विकेट बचा था। वह बहादुरी से मैदान में उतरे, अपने दाहिने हाथ में बल्ला पकड़े हुए, अपने चोटिल बाएं हाथ को स्वेटर के नीचे दबाए हुए। ओवल के दर्शकों ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। लेकिन, टीम 6 रनों से हार गयी। इस दौरान अनुभवों को वोक्स ने द गार्जियन को दिए एक इंटरव्यू में साझा किया है। उन्होंने कहा, “अंत में यह एक कड़वा-मीठा अनुभव था। मेरे मन में एक सवाल उठ रहा था कि क्या मैं गेंद को बचा सकता था, शायद एक ओवर बचा सकता था, एक रन ले सकता था या चौका लगा सकता था।”

हालांकि, इंग्लैंड के तेज गेंदबाज शुक्रगुज़ार थे कि उन्हें किसी भी शॉर्ट-पिच गेंद का सामना नहीं करना पड़ा। वोक्स ने आगे कहा, “लेकिन इसका दूसरा पहलू यह था ‘भगवान का शुक्र है कि मुझे 90 मील प्रति घंटे की रफ़्तार वाली बाउंसर का सामना नहीं करना पड़ा, एक हाथ से, उल्टी दिशा में मुँह करके।’ और मुझे पता था कि अगर मैं स्ट्राइक पर आया तो मुझे कुछ बाउंसर झेलने पड़ेंगे। ये वाकई चिंताजनक एहसास थे। आप अभी भी मैदान पर काफी खुले रहते हैं।’ उन्होंने गस एटकिंसन के साथ 10 बहुमूल्य रन जोड़े, इससे पहले कि सिराज ने एक शानदार यॉर्कर फेंककर मैच समाप्त किया। भारत छह रन से जीता और सीरीज़ 2-2 से बराबर हो गई।

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