नई दिल्ली। कांग्रेस को अब कॉकरोच जनता पार्टी का साथ मिलता दिख रहा है। कांग्रेस सांसद व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने बुधवार को आरोप लगाए थे कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) के आदेश के बाद पुलिस ने कार्रवाई की थी। अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस बयान पर कांग्रेस का साथ दिया है और जवाब मांगा है। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने इसपर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। अब सीजेपी ने कहा है कि इससे गृहमंत्री की भूमिका पर सवाल उठते हैं।
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राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सदन में गृह मंत्री की गैरमौजूदगी को लेकर दावा किया कि ‘तथाकथित गृह मंत्री’ को हिम्मत नहीं है कि वह सदन में आ सकें। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि ‘गृह मंत्री सदन में नहीं हैं क्योंकि वह डरे हुए हैं। इसके बाद, उन्होंने छात्रों पर बल प्रयोग का जिक्र करते हुए गृह मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Samajwadi Party President Akhilesh Yadav) ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं तो सरकार को बताना चाहिए कि छात्रों पर बलप्रयोग का आदेश किसने दिया था।
CJP ने दिया कांग्रेस का साथ
सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास (CJP Spokesperson Saurabh Das) ने इस पर राहुल गांधी का बयान शेयर कर सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने लिखा कि यह 20 जुलाई को पुलिस क्रूरता मामले में गृहमंत्री की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाता है। उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना जरूरी है। हर जान कीमती है। गृहमंत्री के आदेश पर एक छात्र ने आंखों की रोशनी गंवा दी। इस पर अभी जवाब देना होगा।
भाजपा ने झूठा करार दिया
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भाजपा ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के उस दावे को ‘झूठ’ करार दिया कि पिछले सप्ताह संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारी छात्रों पर गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) के आदेश पर पुलिस ने गोलियां चलाई थीं। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राजनीतिक फायदे के लिए भ्रम फैलाने और अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा (Spokesperson Sambit Patra) ने गांधी की इस टिप्पणी की भी आलोचना की कि शाह 30 गाड़ियों के काफिले में चलते हैं, क्योंकि वह डरे हुए हैं।
भाजपा सांसद ने कहा कि यह झूठ है। शायद प्रधानमंत्री के काफिले में भी 30 गाड़ियां नहीं होतीं। राहुल गांधी, आइए और मुझे दिखाइए कि अमित शाह के काफिले में आपने वे 30 गाड़ियां कहां देखीं?’ प्रवक्ता ने कहा कि जहां भी कोई विरोध-प्रदर्शन या मार्च होता है, वहां मौजूद मजिस्ट्रेट ही यह तय करता है कि जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही हो तो क्या कार्रवाई की जानी चाहिए, न कि गृह मंत्री। उन्होंने कहा कि सिर्फ इसलिए कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन आती है, इसका मतलब यह नहीं है कि गृह मंत्री ऐसी हर स्थिति के लिए आदेश जारी कर रहे हैं।