Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. एस्ट्रोलोजी
  3. Durga Chalisa : श्री दुर्गा चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के भाग्य में होती है वृद्धि , जानें मां दुर्गा का सबसे शक्तिशाली मंत्र

Durga Chalisa : श्री दुर्गा चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के भाग्य में होती है वृद्धि , जानें मां दुर्गा का सबसे शक्तिशाली मंत्र

By अनूप कुमार 
Updated Date

Durga Chalisa : सनातन धर्म में मां दुर्गा को शक्ति की अधिष्ठत्री देवी कहा जाता है। मां दुर्गा को सभी देवी और देवताओं से अधिक शक्तिशाली माना गया है। क्योंकि इनका दूसरा रूप शक्ति का है और शक्ति के बिना देव या फिर देवी कर कोई अधूरा है। पौराणिक कथा के मुताबिक, मां दुर्गा की स्तुति के लिए दुर्गा चालीसा का पाठ करना सबसे उत्तम माना गया है। इसका पाठ करने से सिर्फ मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है इसके साथ ही जातक के जीवन में चल रही कई सारी परेशानियों का नाश भी होता है।

पढ़ें :- Kalashtami Vrat 2026 :  कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की विशेष पूजा की जाती है , जानें तिथि और व्रत नियम  

माता की आरती करें
दुर्गा चालीसा पढ़ने के लिए सूर्योदय के पहले उठ कर स्नान कर लें और फिर साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा पर फूल, रोली, दीप, दूध और प्रसाद चढ़ाकर विधिवत पूजा अर्चना करें। अब दुर्गा चालीसा का पाठ करें और इसके बाद माता की आरती करें। फिर प्रसाद लेकर अपने काम पर निकल जाएं।

कष्टों का नाश
मान्यता है कि जो भी व्यक्ति दुर्गा चालीसा का पाठ करता है वह कई सारे रोगों से दूर रहता है और इसका पाठ करने वाला व्यक्ति लंबे समय तक जीवित भी रहता है।

जीवन में स्थिरता
जिन लोगों के जीवन में उथल-पुथल चल रही हो उन्हें दुर्गा चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए। इस पाठ को करने से जीवन में स्थिरता बनी रहती है और कई समस्यों का समाधान भी हो सकता है।

मां दुर्गा का मूल मंत्र
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

पढ़ें :- Surya Gochar 2026 : सूर्य देव 15 मार्च को मीन राशि में करेंगे प्रवेश , इन राशियों का शुरू हो सकता है सुनहरा समय

मां दुर्गा का सबसे शक्तिशाली मंत्र
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्र काली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते..!!
सर्वबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्यै सुतान्विताः मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः।।

Advertisement