लखनऊ। देश के केंद्रीय और पूर्वी हिस्सों में सक्रिय मानसूनी तंत्र के कारण भारी तबाही मची हुई है। उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में गंगा नदी के उफान पर होने से बाढ़ का संकट काफी गहरा गया है। वहीं, मौसम विभाग (IMD) ने मध्य प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी देते हुए हाई अलर्ट की घोषणा की है।
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यूपी-बिहार में खतरे के निशान से ऊपर नदियां
वहीं बिहार के कई जिलों जैसे बक्सर से लेकर भागलपुर और आरा तक गंगा नदी खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। बक्सर के निचले और तटीय इलाकों में बाढ़ का पानी सड़कों पर पहुंच गया है। इसको देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों को खाली कराना शुरू कर दिया है। इन जिलों के अलावा गया और चंपारण क्षेत्र में वज्रपात की भी आशंका जताई गई है।
उत्तर प्रदेश के 19 जिलों में अलर्ट
उत्तर प्रदेश में वाराणसी, प्रयागराज और अमरोहा सहित राज्य के 19 से अधिक जिलों में गंगा और यमुना का जलस्तर काफी तेजी से बढ़ रहा है। वहीं वाराणसी में गंगा का जलस्तर 20 मिलीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है, जिससे घाट पूरी तरह से पानी में डूब चुका हैं। साथ ही मौसम विभाग ने यूपी के 29 जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का अलर्ट भी जारी किया है।
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मध्य प्रदेश
यहां पर बरगी डैम के नौ गेट खोले गए है। वहीं चित्रकूट में मंदाकिनी उफान पर है। इसके अलावा यहां के 22 जिलों के लिए मौसम विभाग ने चेतावनी दी है। जबलपुर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग सहित मध्य प्रदेश के 22 जिलों में मूसलाधार बारिश का अनुमान जताया जा रहा है। साथ ही भारी आवक के कारण जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने बरगी डैम के 9 गेट खोल दिए गए हैं, जिससे निचले इलाकों में जलस्तर और बढ़ गया है। यहां सतना के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी रामघाट की दुकानों और कामदगिरी मंदिर के रास्तों तक पहुंच गया है।
पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन, बंद हुईं सड़कें
हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण 125 से अधिक मुख्य सड़कें बंद हो गई हैं। उत्तराखंड की सभी प्रमुख नदियां इस समय बहुत ही उफान पर हैं, जिससे चारधाम यात्रा मार्गों पर भी बहुत असर पड़ा है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के मुंगेली और बिलासपुर में आकाशीय बिजली गिरने और नदी के तेज बहाव के कारण जान-माल के नुकसान की खबर है। साथ ही मौसम विभाग ने ओडिशा और छत्तीसगढ़ में अगले 24 घंटों में अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है। साथ ही IMD ने आम जनता से अपील की है कि वे अगले दो से तीन दिनों तक नदियों, जलभराव वाले क्षेत्रों और पहाड़ों की यात्रा करने से बचें।