Ganesh Chaturthi 2025 : गणेश चतुर्थी का उत्सव बस कुछ दिन ही दूर है। गणपति उपासकों की सक्रियता बढ़ गई। हर घर में गली कूचे में मंदिरों में और बड़े बड़े पंड़ालों में गणपति के आगमन की भव्य तैयारियां आरंभ हो गई है। यह त्योहार प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता गणेश जी का जन्मदिन है। श्री गणेश की पूजा किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले की जाती है, क्योंकि वे बाधाओं को दूर करते हैं , संकटों को हरते हैं और बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि प्रदान करते हैं। आइए जानें कि 2025 में यह उत्सव कब और कैसे मनाया जाएगा।
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पंचांग
द्रिक पंचांग के मुताबिक, गणेश चतुर्थी 2025 बुधवार, 27 अगस्त को मनाई जाएगी। कुछ लोग 26 अगस्त को उत्सव शुरू होने की बात कर रहे हैं, लेकिन पंचांग के हिसाब से 27 अगस्त ही सही तारीख है। इस दिन भक्त बप्पा की मूर्ति घर लाएंगे और पूजा-अर्चना करेंगे।
गणेश चतुर्थी तिथि का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष के अनुसार, भगवान गणेश केतु ग्रह के स्वामी हैं। गणेश चतुर्थी पर उनकी पूजा करने से कुंडली में केतु के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया आसान होती है। केतु ग्रह अक्सर जीवन में बाधाएं पैदा करता है। विघ्नहर्ता के रूप में, भगवान गणेश इन बाधाओं पर विजय पाने और आध्यात्मिक बाधाओं को दूर करने में मदद करते हैं। गणेश चतुर्थी पर सूर्य की कन्या राशि में उपस्थिति और चंद्रमा की स्थिति मिलकर मानसिक स्पष्टता और नए कार्यों को शुरू करने के लिए एक उत्कृष्ट समय प्रदान करती है।
मोदक’ व फलों का भोग
स्थानीय परंपराओं के साथ बप्पा (भगवान गणेश) की पूजा में मिट्टी की प्रतिमाओं की स्थापना, ‘वक्रतुण्ड महाकाय’ जैसे मंत्रों का जाप, और ‘मोदक’ व फलों का भोग शामिल है।
दूर्वा और शमी पत्ता भी चढ़ाया जाता है
पूजा में दूर्वा (घास) और शमी पत्ता भी चढ़ाया जाता है। हर क्षेत्र की अपनी विशेषताएँ हैं, जैसे महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक उत्सव होते हैं, जबकि तमिलनाडु में व्यक्तिगत भक्ति और पारंपरिक शास्त्रीय संगीत पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाता है। भरतनाट्यम जैसे शास्त्रीय नृत्यों में गणेश को समर्पित नृत्य प्रदर्शन होते हैं, जैसे कि “गणपति कौथुवम”।
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भरतनाट्यम “गणपति कौथुवम”
भरतनाट्यम में गणपति कौथुवम एक पारंपरिक स्तुति नृत्य है जो भगवान गणेश की स्तुति और वंदना करता है, जिसमें नृत्य (नृत्य) और अभिनय (अभिनय) का मिश्रण होता है, जो भगवान गणेश की कृपा और कला जगत में सफलता के लिए प्रार्थना करता है। भरतनाट्यम में एक स्वागत गीत के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।