Holashtak 2025 : उत्साह, उमंग, धूम का त्योहार होली हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। होली के आठ दिन पहले होलाष्टक की शुरुआत होती है। होलाष्टक लगने के बाद होली तक कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है। होलाष्टक के पीछे ज्योतिषीय कारण से लेकर धार्मिक मान्यताएं तक शामिल हैं।
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होलिका दहन से पूर्व होलाष्टक लगते हैं। इस बार होलाष्टक 7 मार्च 2025 से शुरू हो रहे हैं। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक शुरू होकर फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि यानी होलिक दहन पर खत्म होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होलाष्टक में कोई भी मांगलिक कार्य जैसे शारी, गृह प्रवेश, मुंडन से लेकर नामकरण तक नहीं किया जाते हैं। इसकी वजह होलाष्टक में सभी ग्रहों का उग्र अवस्था में होना है।
पूर्णिमा को राहु उग्र होते हैं
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र होते हैं, इसलिए होलाष्टक के 8 दिनों में शुभ काम नहीं किए जाते।
नरसिंह भगवान की पूजा
इस दौरान शादियां, गृह प्रवेश, सगाई, मुंडन या कोई शुभ काम नहीं होते लेकिन ध्यान और पूजा-पाठ के लिए यह समय बहुत अच्छा माना जाता है। होलाष्टक के दौरान विष्णु जी और नरसिंह भगवान की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है।