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गृह मंत्री अमित शाह ने अपने रिटायरमेंट प्लान का कर दिया ऐलान, बताया कि राजनीति से संन्यास लेने के बाद क्या करेंगे?

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में राजनेताओं के रिटायरमेंट की कोई समय सीमा नहीं है। लेकिन पर गाहे-बेगाहे राजनेताओं के रिटायरमेंट को लेकर हमेशा चर्चा होते रहती है। भारतीय संविधान के मुताबिक, कोई व्यक्ति किसी भी उम्र तक चुनाव लड़ सकता है। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने अपना रिटायरमेंट प्लान (Retirement Plan) बता दिया है। बल्कि उन्होंने अपना फ्यूचर प्लान भी जाहिर कर दिया है।

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उन्होंने कहा कि मैंने तय किया है कि जब भी रिटायर हो जाऊंगा, तो मैं बाकी का जीवन प्राकृतिक खेती के काम में लगा दूंगा। अहमदाबाद में एक कार्यक्रम में बोलते हुए शाह ने कहा कि रिटायरमेंट के बाद का अपना जीवन मैं वेद, उपनिषद पढ़ने और प्राकृतिक खेती के लिए खर्च करूंगा। उन्होंने कहा कि ये प्राकृतिक खेती एक प्रकार का वैज्ञानिक प्रयोग है जो कई प्रकार के फायदे देती है।

अमित शाह (Amit Shah)  ने कहा कि उर्वरक वाला गेहूं खाने से कैंसर होता है। बीपी बढ़ता है। थायरॉइड की प्रॉब्लम होती है। खाने वाले शख्स के शरीर को अच्छा बनाए रखने के लिए बिना फर्टिलाइजर वाला भोजन करना जरूरी है, अगर ऐसा होगा तो इसका मतलब दवाइयों की जरूरत ही नहीं होगी। अमित शाह (Amit Shah)  ने आगे कहा कि इससे उत्पादन भी बढ़ता है। उन्होंने कहा कि मेरे खेत में मैंने प्राकृतिक खेती अपनाई है, आज मेरे अनाज उत्पादन में लगभग डेढ़ गुना बढ़ोतरी हो चुकी है। अमित शाह फिलहाल राजनीतिक जीवन में सक्रिय है, लेकिन वो अभी भी अपनी जमीन पर प्राकृतिक खेती करते हैं।उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में एक बूंद पानी भी बर्बाद नहीं होता।

युवाओं को अमित शाह ने क्या दिया संदेश?

अमित शाह (Amit Shah)  ने युवाओं से आग्रह किया कि वे अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए दो घंटे शारीरिक व्यायाम और छह घंटे की नींद का नियम अपनाएं। उन्होंने कहा कि युवाओं के पास देश की प्रगति में योगदान देने के लिए अभी 40-50 साल हैं।

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उन्होंने कहा कि मैं जब गृह मंत्री बना तो लोग मुझे कहते थे कि बड़ा विभाग आपको मिला है। सरदार पटेल भी इस पद पर थे तो यह बड़ी बात है, लेकिन जिस दिन मुझे सहकारिता मंत्री बनाया गया तो मैंने समझा कि यह होम मिनिस्टर से भी बड़ा पद है। इस दौरान उन्होंने सहकारी कार्यकर्ताओं से कहा कि आप लोग कभी भी मुझसे मिल सकते हैं। अमित शाह (Amit Shah) ने इस दौरान सहकारी महिला कार्यकर्ताओं से संवाद किया और उनके सवालों के भी जवाब भी दिए। कार्यक्रम के दौरान अमित शाह (Amit Shah) ने देश में सहकारी क्रांति का जिक्र किया। उन्होंने गुजरात बनासकांठा का उदाहरण देते हुए कहा कि जब मैं पैदा हुआ था, तब बनासकांठा में सप्ताह में केवल एक बार नहाने के लिए पानी मिलता था। बनासकांठा और कच्छ गुजरात के सबसे अधिक पानी की कमी वाले जिले थे। आज, वहां एक परिवार केवल दूध उत्पादन से सालाना 1 करोड़ रुपये कमा रहा है। यह एक बहुत बड़ा बदलाव है।’

अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि यदि आप प्राकृतिक खेती करेंगे तो बारिश का पानी बिलकुल बर्बाद नहीं होगा। खाद ज्यादा डालने से जमीन में केचुआ नहीं बनते और अन्य कीट खत्म होते हैं। उन्होंने कहा कि एक देसी गाय से तीस एकड़ की खेती हो सकती है। गुजरात में तो एक गाय के रखरखाव के लिए महीने में 900 रुपये की रकम सरकार देती है। इससे उत्पादन बढ़ता, सेहत सही रहती है और धरती भी सही रहती है। हर तरह से प्राकृतिक खेती हमारे लिए फायदेमंद है। भारत सरकार के सहाकारिता मंत्रालय ने प्राकृतिक खेती की उपज खरीदने के लिए समितियां बनाई हैं। इसके एक्सपोर्ट के लिए भी समितियां बनाई गई हैं। गोबर का उपयोग भी प्राकृतिक खेती में हो जाता है, जबकि लोग इसे ऐसे ही फेंक देते हैं।

 

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