Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. अपराध
  3. नाबालिग पत्नी से निकाह के 4 दिन तक फिजिकल हुआ शौहर, केरल हाई कोर्ट ने कहा- शरीयत POSCO का कवच नहीं

नाबालिग पत्नी से निकाह के 4 दिन तक फिजिकल हुआ शौहर, केरल हाई कोर्ट ने कहा- शरीयत POSCO का कवच नहीं

By santosh singh 
Updated Date

कोच्चि : केरल हाई कोर्ट (Kerala High Court) ने 17 साल की लड़की के साथ बार-बार रेप करने के आरोपी एक व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि भले ही उनकी शादी मुस्लिम धार्मिक रीति-रिवाजों से हुई हो, फिर भी यह उसे ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम’ (POCSO) के तहत आपराधिक दायित्व से नहीं बचाएगी। जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने मन्नारक्कड़ पुलिस स्टेशन (Mannarkkad Police Station) में दर्ज और अब पट्टाम्बी की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (Fast Track Special Court) में लंबित मामले के मुख्य आरोपी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपों से ऐसे मुद्दे उठते हैं जिनका फैसला केवल पूरी सुनवाई के बाद ही किया जा सकता है, हालांकि प्रथम दृष्टया ये आरोप अपराधों को उजागर करते हैं।

पढ़ें :- सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर जंतर-मंतर प्रोटेस्ट की सभी FIR रद्द की, नहीं होगी दर्ज नई FIR

‘इंडिपेंडेंट थॉट’ मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के तय किए गए कानून का हवाला देते हुए, हाई कोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाता है, उस पर IPC की धारा 376 के तहत रेप का मुकदमा चलाया जा सकता है, भले ही पीड़िता उसकी पत्नी हो और उसकी उम्र 15 से 18 साल के बीच हो। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में आरोपी IPC की धारा 375 के अपवाद 2 का सहारा लेकर मुकदमे से बच नहीं सकता।

आरोपी की दलील पर हाई कोर्ट की टिप्पणी

आरोपी ने दलील दी थी कि लड़की उसकी कानूनी पत्नी है। उन्होंने इस्लामिक रीति-रिवाजों के अनुसार तब शादी की थी जब लड़की की उम्र 17 साल और एक महीना थी। इस दलील को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि POCSO एक्ट तब लागू होता है जब शादी करने वालों में से कोई एक नाबालिग हो। भले ही पर्सनल लॉ के तहत वह शादी वैध हो। कोर्ट ने कहा कि आरोपी शादी के रिश्ते का हवाला देकर कानूनी कार्रवाई से बच नहीं सकता।

अगर बहस के लिए यह मान भी लिया जाए कि शादी मुस्लिम धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार हुई थी, तो भी इससे याचिकाकर्ता की आपराधिक जवाबदेही खत्म नहीं होगी। खासकर इसलिए क्योंकि कथित शादी और उसके बाद हुए यौन कृत्यों के समय लड़की 17 साल की थी। इसमें कोई विवाद नहीं है कि अगर शादी करने वाले पक्षों में से कोई एक नाबालिग है, तो POCSO एक्ट के प्रावधान लागू होते हैं, चाहे पर्सनल लॉ के तहत शादी वैध हो या नहीं।

पढ़ें :- सुप्रीम कोर्ट में केंद्र के आश्वासन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने लिया बड़ा फैसला, 5 सितंबर को नहीं करेगी 'दिल्ली मार्च'

क्या है पूरा मामला?

आरोपी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 528 के तहत कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 23 अक्टूबर 2021 को वह कथित तौर पर लड़की को कार में अपने घर ले गया और 23 से 26 अक्टूबर के बीच कई बार उसका बलात्कार किया। दूसरे और तीसरे आरोपी ने कथित तौर पर इस अपराध में मदद की। अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि लड़की के माता-पिता को पहले आरोपी द्वारा किए गए कथित अपराध की जानकारी होने के बावजूद, उन्होंने उसे वापस नहीं लिया और न ही अधिकारियों को मामले की सूचना दी।

प्रतिवादी वकील ने दी क्या दलील?

याचिका का विरोध करते हुए, पहले प्रतिवादी के वकील ने तर्क दिया कि लड़की 18 साल से कम उम्र की थी और इसलिए POCSO एक्ट के तहत एक बच्ची थी। वकील ने कहा कि उसके साथ यौन संबंध बनाना एक्ट के तहत अपराध माना जाएगा, चाहे शादी का दावा कुछ भी हो। FIR में लगाए गए आरोपों का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोपी कथित तौर पर कार से आया, लड़की से कहा कि वह उसके लिए कपड़े खरीदेगा और उसे थोट्टारा में अपने घर ले गया।

लड़की ने चार दिनों तक जबरन शारीरिक संबंध बनाने का लगाया आरोप

पढ़ें :- अभिजीत दीपके ने 5 सितंबर को दिल्ली मार्च का किया ऐलान, सुप्रीम कोर्ट का इस पर रोक लगाने से इनकार

यह भी आरोप लगाया गया कि उसे वहां रखा गया और जब उसने आरोपी की मां के साथ सोने की इच्छा जताई, तो उसे आरोपी के बेडरूम में भेज दिया गया। कथित तौर पर दरवाजा बाहर से बंद कर दिया गया था। लड़की ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने 23 अक्टूबर की रात उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए और अगले चार दिनों तक ऐसा करता रहा।

काजी और लड़की के भाई ने बताया आरोपी की पत्नी

कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों की सच्चाई का फैसला पूरी सुनवाई के बाद ही किया जा सकता है। कोर्ट ने आरोपी के इस दावे की भी जांच की कि लड़की उसकी कानूनी रूप से ब्याही पत्नी है और पाया कि यह दावा मुख्य रूप से लड़की, उसके भाई और उस मस्जिद के काजी के पुलिस को दिए गए बयानों पर आधारित था जहां कथित तौर पर शादी हुई थी। कोर्ट ने कहा कि फिर भी, क्या याचिकाकर्ता के दावे के अनुसार वास्तव में कोई वैध शादी हुई थी, यह बात सुनवाई के बाद ही तय की जा सकती है, खासकर इसलिए क्योंकि ऐसी शादी होने का कोई दस्तावेज़ी सबूत नहीं है।

केरल हाई कोर्ट ने कहा कि यह साफ है कि अठारह साल से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाने पर POCSO एक्ट के तहत अपराध बनता है, और ऐसी स्थिति में, बच्ची आरोपी की पत्नी है या नहीं, इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता।

एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि POCSO एक्ट एक खास कानून है जिसे बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया है। कोर्ट ने एक्ट की धारा 2(1)(d) का ज़िक्र किया, जिसके तहत बच्चे का मतलब 18 साल से कम उम्र का कोई भी व्यक्ति है, और धारा 42A का भी ज़िक्र किया, जो दूसरे कानूनों के साथ टकराव की स्थिति में इस कानून को प्राथमिकता देती है।

पढ़ें :- देहरादून जिम मालिक मोहम्मद दीपक को कोर्ट से 'सुप्रीम राहत', FIR पर स्टे
Advertisement