Indian climber Bhupatiraju : भारतीय पर्वतारोही भूपतिराजू ने दुनिया के सात सबसे ऊंचे ज्वालामुखी शिखरों को फतह कर नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया। इसी के साथ पर्वतारोही भूपतिराजू ने इतिहास रच दिया। भूपतिराजु अनमिश वर्मा ने महज 92 दिन, 4 घंटे और 45 मिनट में दुनिया के सात सबसे ऊंचे ज्वालामुखी शिखरों को फतह कर नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया। यह उपलब्धि 6 फरवरी 2026 को आधिकारिक रूप से पुष्टि की गई और 27 फरवरी 2026 को इसे मान्यता भी मिल गई। भूपतिराजू के इस साहस भरे काम के बाद उन्होंने दुनियाभर में नाम कमाया है और गिनीज बुक में भी अपना नाम दर्ज करवा लिया है।
पढ़ें :- 10 नहीं पूरा 14.2 किलो का गैस सिलिंडर मिलेगा', वायरल न्यूज पर पेट्रोलियम मंत्रालय का दो टूक बयान
साहस के कदम
अनमिश वर्मा ने अपनी इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत 23 अक्टूबर 2024 को रूस के माउंट एल्ब्रस से की थी। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग महाद्वीपों में स्थित खतरनाक और कठिन ज्वालामुखी शिखरों को पार किया और अंत में 23 जनवरी 2025 को अंटार्कटिका के माउंट सिडली पर पहुंचकर इस मिशन को पूरा किया। यह सफर बेहद कठिन था, जिसमें बर्फीले तूफान, ऊंचाई और खराब मौसम जैसी कई चुनौतियां शामिल थीं।
कौन-कौन से शिखर शामिल हैं?
सात ज्वालामुखी शिखर (Seven Volcanic Summits) दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में स्थित ज्वालामुखी पहाड़ों का समूह है. इनमें शामिल हैं:
– माउंट किलिमंजारो (Mount Kilimanjaro)
– ओजोस डेल सलादो (Ojos del Salado)
– पिको डी ओरिज़ाबा (Pico de Orizaba)
– माउंट गिलुवे (Mount Giluwe)
– माउंट एल्ब्रस (Mount Elbrus)
– दमावंद पर्वत (Mount Damavand)
– माउंट सिडली (Mount Sidley)
Fastest time to climb the seven volcanic summits (male)
92 days 4 hours and 45 minutes by Bhupathiraju @AnmishVarma pic.twitter.com/DCkKKI1RC9 पढ़ें :- ट्रंप के कंट्रोल में हैं पीएम मोदी, 25 मिनट का भाषण दिया लेकिन अमेरिका के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला: राहुल गांधी
— Guinness World Records (@GWR) March 19, 2026
पढ़ें :- गेंदबाज मिचेल स्टार्क को लेकर दिल्ली कैपिटल्स के हेड कोच ने दिया बड़ा बयान, कहा- एनओसी मिलने का कर रहे है इंतजार
17 मार्च को दिल्ली के विनय मार्ग स्थित CSOI में एक खास पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया था। इसी समारोह में भूपतिराजू को उनका प्रमाण पत्र दिया गया था। गिनीज विश्व रिकॉर्ड की टीम के ऋषि नाथ ने औपचारिक रूप से भूपतिराजू को सम्मानित किया था। इस समारोह ने दुनियाभर के लोगों का ध्यान खींचा और यह साबित कर दिया कि भारतियों की दिलचस्पी लगातार एडवेंचर खेलों में बढ़ती जा रही है।