Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. खेल
  3. 7 वर्षीय इशांक ने श्रीलंका से भारत तक तैरकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, झारखंड के ‘नन्हे तैराक’ ने रचा इतिहास

7 वर्षीय इशांक ने श्रीलंका से भारत तक तैरकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, झारखंड के ‘नन्हे तैराक’ ने रचा इतिहास

By Harsh Gautam 
Updated Date

jharkhand ka ishank

नई दिल्ली।  झारखंड की राजधानी रांची के 7 वर्षीय नन्हे तैराक इशांक ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने पूरे देश को गर्व से भर दिया है। इतनी कम उम्र में इशांक ने समुद्र की ऊंची लहरों और खतरनाक रास्तों को चुनौती देते हुए श्रीलंका के तलाईमन्नार से भारत के धनुषकोड़ी तक करीब 29 किलोमीटर लंबा पाक जलडमरूमध्य तैरकर पार कर लिया।

पढ़ें :- FIFA World Cup 2026 Johan Manjambi : जोहान मंजाम्बी ने रचा इतिहास , गोल दागने में बने सबसे युवा स्विस खिलाड़ी

इस साहसिक उपलब्धि के साथ इशांक दुनिया के सबसे कम उम्र के तैराक बन गए हैं, जिन्होंने श्रीलंका और भारत के बीच स्थित ‘पाक स्ट्रेट’ को तैरकर पार किया। उन्होंने यह कठिन सफर सिर्फ 9 घंटे 50 मिनट में पूरा कर नया इतिहास रच दिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड तमिलनाडु के जय जशवंत के नाम दर्ज था, जिसे अब इशांक ने पीछे छोड़ दिया है।

कड़ी मेहनत और रोजाना अभ्यास

30 अप्रैल 2026 को पूरा हुआ यह अभियान केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और हौसले की मिसाल बन गया। इस शानदार उपलब्धि के लिए इशांक को यूनिवर्सल रिकॉर्ड्स फोरम (यूआरएफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स) की ओर से ‘द यंगेस्ट एंड फास्टेस्ट पाक स्ट्रेट स्विमर’ के विश्व रिकॉर्ड प्रमाणपत्र से सम्मानित किया गया। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए इशांक ने लंबे समय तक कठिन अभ्यास किया। रांची के धुर्वा डैम में वह रोजाना 4 से 5 घंटे तक लगातार तैराकी का अभ्यास करते थे। उनके प्रशिक्षक अमन कुमार जायसवाल और बजरंग कुमार के मार्गदर्शन में उन्होंने खुद को इस चुनौती के लिए तैयार किया।

स्कूल और राज्य को गर्व

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रांची के डीएवी श्यामली स्कूल में कक्षा तीसरी के छात्र इशांक की इस सफलता से पूरा विद्यालय भी गौरवान्वित है। स्कूल के प्रिंसिपल बी.एन. झा ने कहा कि इतनी छोटी उम्र में समुद्र जैसी कठिन चुनौती को पार करना असाधारण साहस और आत्मविश्वास का परिचायक है। इशांक ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती। इशांक की यह उपलब्धि सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय बन गई है। उनके इस साहसिक कदम ने तिरंगे का मान बढ़ाया है और देश के लाखों बच्चों को बड़े सपने देखने की प्रेरणा दी है

पढ़ें :- भगवान कृष्ण ने मथुरा छोड़ने के बाद बसाई थी द्वारका नगरी,उनके प्रपौत्र वज्रनाभ ने करवाया था द्वारकाधीश मंदिर का निर्माण
Advertisement