Kanwar Yatra 2026 : हिंदू धर्म (Hinduism) में सावन माह (Month of Sawan) की महिमा ही निराली है। इस माह हर तरफ बम भोले के जयकारे (Chants of ‘Bam Bhole’) गूंजते हैं। भक्त भोलेनाथ की श्रद्धा भाव से अराधना करते हैं। बता दें कि चातुर्मास के चार महीनों में से एक महीना सावन का होता है। यह भगवान शिव का प्रिय महीना है। भक्त बेसब्री से सावन माह (Month of Sawan) का इंतजार करते हैं और हर बार की तरह इस बार भी महादेव की भक्ति में सराबोर होने के लिए देश भर के शिव भक्तों ने अभी से अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
पढ़ें :- सुप्रीम कोर्ट, बोला- 'हिंदू धर्म जीवन शैली है', किसी व्यक्ति के हिंदू बने रहने के लिए मंदिर जाना या धार्मिक अनुष्ठान करना जरूरी नहीं
सावन माह में सोमवार व्रत का विशेष महत्व माना गया है और इसके साथ इस माह भक्त कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) पर भी जाते हैं। आइए जानते हैं ‘बम-बम भोले’ के जयकारों के साथ निकलने वाली यात्रा की महत्वपूर्ण तारीखें और शुभ मुहूर्त, ताकि आपकी भक्ति यात्रा बिना किसी रुकावट के पूरी हो सकें।
कांवड़ यात्रा 2026 कब होगी शुरू?
वैदिक पंचांग (Vedic Panchang) के अनुसार इस साल सावन का महीना 30 जुलाई 2026, गुरुवार से शुरू होगा और इसी के साथ कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) भी शुरू होगी। इस दौरान कांवडिए हरिद्वार से गंगाजल लेकर आते हैं और सावन की शिवरात्रि (Sawan Shivratri) के दिन उससे भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। बता दें कि कावंड़ यात्रा (Kanwar Yatra) का समापन 11 अगस्त 2026, मंगलवार के दिन होगा और इसी दिन सावन शिवरात्रि मनाई जाएगी।
आखिर क्यों निकाली जाती है कांवड़ यात्रा?
पढ़ें :- Vote Chor Gaddi Chhod Rally : दिल्ली रैली में दहाड़े खरगे, बोले- देश की 140 करोड़ जनता को बचाना है, इसलिए बेटे को देखने बेंगलुरु नहीं गया
हिंदू धर्म (Hinduism) में कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) का विशेष महत्व माना जाता है और यह सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक है। इस दौरान भोलेनाथ के भक्त गंगाजल (Gangajal) लेकर आते हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार गंगाजल (Gangajal) से भगवान शिव का अभिषेक किया जाए तो वह प्रसन्न होकर अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। जो व्यक्ति श्रद्धा-भाव से कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) पर जाता है उसे सुख-समृद्धि व खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है। अक्सर भक्तों में मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) क्यों निकाली जाती है?
तो बता दें कि इसके पीछे कुछ पौराणिक व धार्मिक कारण छिपे हुए हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ, तो उसमें से चौदह रत्न निकले। उन रत्नों में सबसे पहले भयंकर ‘हलाहल विष’ निकला, जिससे पूरी सृष्टि नष्ट होने लगी। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव (Lord Shiva) ने उस विष को पी लिया और उसे अपने कंठ में ही रोक लिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया, जिससे वे ‘नीलकंठ’ कहलाए। विष की वजह से महादेव का शरीर अत्यधिक गर्म होने लगा और वे जलन से तड़पने लगे। तब देवताओं ने उन पर पवित्र नदियों का शीतल जल अर्पित करना शुरू किया ताकि विष की गर्मी शांत हो सके। माना जाता है कि तभी से सावन के महीने में शिव जी को जल चढ़ाने और कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) की परंपरा शुरू हुई।