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क्या जरूरत थी छात्रों पर आंसू गैस, पैलेट गन और AK-47 चलवाने की…संसद में प्रियंका गांधी ने पूछा सवाल

क्या जरूरत थी-छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़ने की, उनपर लाठियां बरसाने की? क्या जरूरत थी- नौजवान लड़कियों को जलील करते हुए उनके कपड़े फाड़ने की, उनको बेरहमी से पिटवाने की? क्या जरूरत थी- देश के युवाओं पर पैलेट गन, AK-47 चलवाने की, क्या वे आतंकवादी हैं? आज ये सवाल सिर्फ कांग्रेस पार्टी नहीं, बल्कि पूरा देश पूछ रहा है और इसका जवाब देने की जिम्मेदारी सरकार की है। ये सरकार देश के नौजवानों से क्यों डरती है, उनकी आवाज दबाने का हक सरकार को किसने दिया?

By शिव मौर्या 
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Parliament Session: लोकसभा में बोलते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा, कुछ दिन पहले हम दिल्ली के एक अस्पताल में पुलिस की लाठीचार्ज से घायल हुई छात्रा से मिलने पहुंचे। जिंदगी और मौत से लड़ रही उस बच्ची की मां ने कांपते हुए हमसे कहा-”सुबह से यहां बड़े-बड़े लोग आ रहे हैं, वीडियो बना रहे हैं। यहां वे भी आए, जिन्होंने मेरी बेटी का ये हाल कर दिया। ये सब आखिर किस लिए? मेरी बेटी की बलि तो चढ़ गई है, लेकिन उसे कुछ भी हो जाए, तो मैं उसके लिए अपने आप लड़ूंगी।”

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उस मां की आवाज आज भी मेरे मन में गूंज रही है और इसलिए मैं प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से पूछना चाहती हूं कि क्या जरूरत थी—एक मासूम बच्ची का दमन करने की? लड़कियों को जलील कर, उनके कपड़े फाड़ने की? छात्रों पर आंसू गैस, पैलेट गन और AK-47 चलवाने की? क्या ये बच्चे आतंकवादी हैं? गृह मंत्री अमित शाह और PM मोदी को जवाब देना होगा कि बच्चों पर हमला करने का आदेश किसने दिया? ये सवाल आज पूरा देश पूछ रहा है।

उन्होंने आगे कहा, क्या जरूरत थी-छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़ने की, उनपर लाठियां बरसाने की? क्या जरूरत थी- नौजवान लड़कियों को जलील करते हुए उनके कपड़े फाड़ने की, उनको बेरहमी से पिटवाने की? क्या जरूरत थी- देश के युवाओं पर पैलेट गन, AK-47 चलवाने की, क्या वे आतंकवादी हैं? आज ये सवाल सिर्फ कांग्रेस पार्टी नहीं, बल्कि पूरा देश पूछ रहा है और इसका जवाब देने की जिम्मेदारी सरकार की है। ये सरकार देश के नौजवानों से क्यों डरती है, उनकी आवाज दबाने का हक सरकार को किसने दिया?

प्रियंका गांधी ने आगे पूछा, ये सदन यहां बैठे सांसदों की जागीर नहीं है, ये देश की अमानत है। हम नागरिकों के सेवक और उनके प्रतिनिधि हैं। देश का संविधान हमारे लिए सर-आंखों पर है और लोकतंत्र सर्वोपरि है। इसे ध्वस्त करना पाप है। देश की जनता हम से सिर्फ जवाबदेही मांगती है। हमें यहां भेजकर जनता बस यही चाहती है कि हम उनकी भलाई के लिए काम करें और अगर उनके साथ अन्याय हो तो उन्हें न्याय दिलवाएं।

 

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