लखनऊ अग्निकांड: लखनऊ के विकास नगर में बुधवार शाम लगी भीषण आग ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। यह आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते सैकड़ों झुग्गी-झोपड़ियां इसकी चपेट में आ गईं। करीब 8 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद देर रात आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस दर्दनाक हादसे में दो छोटे बच्चों की लाश मिली है, जिनकी उम्र लगभग 2 साल बताई जा रही है। आग बुझने के बाद जब राहत और बचाव टीमों ने मलबे में तलाशी शुरू की, तब इन मासूमों के शव बरामद हुए। परिजनों की पहचान कराने की प्रक्रिया जारी है।
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कैसे लगी आग और कैसे फैली
घटना मुंशीपुलिया से आगे सीतापुर बाईपास किनारे स्थित झुग्गी बस्ती की है, जहां लंबे समय से सैकड़ों परिवार रह रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम करीब 4 बजे बस्ती के पास बनी एक कैंटीन से अचानक आग की लपटें उठीं। शुरुआती समय में लोगों ने इसे बुझाने की कोशिश की, लेकिन तेज हवा और ज्वलनशील सामग्री के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। झुग्गियों में रखे एलपीजी सिलेंडर और बाइक की टंकियों के फटने से लगातार धमाके होने लगे। इन धमाकों ने आग को और भी भयावह बना दिया। देखते ही देखते करीब हजार से ज्यादा झुग्गियां जलकर राख हो गईं।
आग की सूचना मिलने के बाद दमकल और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। स्थिति को देखते हुए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों को भी मौके पर बुलाया गया।दमकल कर्मियों ने चारों तरफ से पानी की बौछार कर आग पर काबू पाने की कोशिश की। कई घंटों की कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद देर रात आग को पूरी तरह बुझाया जा सका।
आग लगते ही बस्ती में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने बच्चों, परिवार के सदस्यों और जरूरी सामान को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कोई अपने लापता बच्चे को ढूंढ रहा था, तो कोई अपने माता-पिता या भाई-बहनों की तलाश में परेशान नजर आया। दम घोंटू धुएं और तेज लपटों के कारण हालात और भी भयावह हो गए। सिविल डिफेंस की टीम ने लोगों को आग के पास जाने से रोकने के लिए मानव श्रृंखला बनाई, लेकिन अपनों की तलाश में लोग बार-बार आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे।
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आग इतनी भयंकर थी कि इसका धुआं करीब 10 किलोमीटर दूर तक देखा गया। आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग भी इस धुएं से प्रभावित हुए और कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई। इस हादसे में हजारों लोग बेघर हो गए हैं। कई परिवारों का पूरा सामान जलकर राख हो गया। कुछ लोगों को रात में रैन बसेरों में ठहराया गया, लेकिन बड़ी संख्या में लोग खुले आसमान के नीचे रातभर आग बुझने के इंतजार में बैठे रहे।गुरुवार सुबह होते ही लोग अपने जले हुए घरों के मलबे में बचा-खुचा सामान ढूंढते नजर आए। कई परिवारों के सामने अब खाने-पीने और रहने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
आग पर काबू पाने के बाद जब मलबे में तलाशी अभियान शुरू किया गया, तो उसमें दो छोटे बच्चों के शव बरामद हुए। डीसीपी पूर्वी दीक्षा शर्मा ने बताया कि आग पूरी तरह नियंत्रित कर ली गई थी, हालांकि एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें अभी भी राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। इस हादसे में अबतक दो बच्चों की लाश मिली है और उनकी पहचान के लिए फोटो के जरिए परिजनों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।