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लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का किया पर्दाफाश, 250 करोड़ से अधिक की ठगी में 119 साइबर अभियुक्त गिरफ्तार

By santosh singh 
Updated Date

लखनऊ। देश के पांच राज्यों तक फैले साइबर अपराधियों के संगठित गिरोह का लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने बुधवार को पर्दाफाश किया है। लखनऊ पुलिस (Lucknow Police) ने लंबी पड़ताल के बाद समिट बिल्डिंग (Summit Building) के 11 फ्लोर पर छापा मारा तो खलबली मच गई।

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पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित साइबर ठगी (Cyber ​​fraud) करने वाले संगठित गिरोह का सफल खुलासा करने के साथ 119 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। इनके पास के साइबर अपराध में प्रयुक्त 103 लैपटॉप, 177 कॉलिंग मोबाइल फोन, अन्य डिजिटल उपकरण, महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किया गया है। कमिश्नरेट लखनऊ की साइबर सेल एवं साइबर थाना की संयुक्त टीम (Joint team of the Lucknow Commissionerate’s Cyber ​​Cell and Cyber ​​Police Station) की सुनियोजित कार्यवाही से बड़ी सफलता मिली है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

गिरोह का नेटवर्क लखनऊ के अलावा पांच से अधिक राज्यों तक फैला हुआ है। इस कंपनी की नेट वर्थ पांच सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की है। काल सेंटर का मालिक विनीत शर्मा ठगी की रकम तीन देशों से होते हुए हवाला के जरिए मंगाता था। पुलिस अब कंपनी के अन्य साझेदारों, संचालकों और पूरे अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

यह लोग विदेशी नागरिकों, विशेषकर संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के लोगों को भारत की प्रतिष्ठित कंपनियों एवं सरकारी एजेंसियों के नाम पर ठगते थे। गिरोह गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टो करेंसी और इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी करता था। इसके ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी एवं विक्रम सिंह परमार आदि को गिरफ्तार किया गया है।

साइबर अपराधियों (Cyber ​​Criminals) के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के क्रम में पुलिस आयुक्त, कमिश्नरेट लखनऊ अमरेंद्र कुमार सेंगर के निर्देशन पर टीम को बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार के पर्यवेक्षण तथा पुलिस उपायुक्त अपराध अनिल कुमार यादव के मार्गदर्शन एवं अपर पुलिस उपायुक्त, अपराध किरन यादव (IPS) के नेतृत्व में सहायक पुलिस आयुक्त साइबर एवं प्रभारी साइबर क्राइम सेल के संयुक्त पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम सेल एवं थाना साइबर क्राइम पुलिस ने एक जुलाई को विभूतिखण्ड की स्थित समिट बिल्डिंग में संचालित एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया। इस कार्यवाही में ऐसे संगठित साइबर गिरोह का खुलासा हुआ है, जो तकनीकी संसाधनों एवं इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कर विदेशी नागरिकों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर धोखाधड़ी कर रहा था।

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गिरोह कर चुका 250 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह गिरोह अमेरिका समेत कई देशों के नागरिकों को निशाना बनाकर अब तक 250 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है। साइबर सेल के पुलिसकर्मी इनसे पूछताछ कर रहे हैं। करीब 15 दिन पहले इस नेटवर्क के संबंध में इनपुट मिला था। इनपुट के आधार पर साइबर सेल और साइबर थाना की संयुक्त टीम ने निगरानी शुरू की। यहां बिना किसी नाम और बोर्ड के जनवरी 2025 से काल सेंटर संचालित किया जा रहा था।

पार्नोग्राफी या अन्य वित्तीय जोखिम का झांसा
जांच में पता चला कि काल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारी विदेशी नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों को फोन करते थे। उन्हें बैंक खाते से रुपये डेबिट होने, तकनीकी समस्या, पार्नोग्राफी या अन्य वित्तीय जोखिम का झांसा देकर मदद के नाम पर अपने जाल में फंसाया जाता था। बदनामी का डर दिखाकर गिफ्ट कार्ड, डिजिटल कूपन और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से रकम हासिल की जाती थी, ताकि लेन-देन सरकारी निगरानी से बचा सके।

काल सेंटर का संचालन सोलारिस साल्यूशन के नाम

प्रारंभिक जांच में काल सेंटर का संचालन सोलारिस साल्यूशन के नाम से होने की जानकारी मिली है। पुलिस ने अहमदाबाद निवासी ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार को हिरासत में लिया है। दोनों यहां आपरेशन मैनेजर के रूप में काम कर रहे थे। उनसे पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य संचालकों और वित्तीय लाभार्थियों की तलाश की जा रही है। काल सेंटर में कार्यरत अधिकांश कर्मचारी पूर्वोत्तर राज्यों के हैं। उन्हें अमेरिकी नागरिकों से बातचीत करने के लिए करीब ढाई माह का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता था। कर्मचारियों को 30 से 40 हजार रुपये मासिक वेतन के साथ ठगी की रकम पर लगभग दस प्रतिशत तक कमिशन भी दिया जाता था। इसी वजह से कई कर्मचारी हर माह डेढ़ से दो लाख रुपये तक कमा रहे थे।

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