नई दिल्ली। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकरी (Chief Minister Suvendu Adhikari) के नेतृत्व वाली बंगाल सरकार (Bengal Government) ने आज हुई राज्य कैबिनेट की पहली बैठक में कई अहम फैसले लिए हैं। इसमें से दो सबसे महत्वपूर्ण फैसले हैं। जून से धार्मिक आधार पर बनी श्रेणियों को दी जाने वाली सरकारी सहायता बंद करना और कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) के आदेश के बाद राज्य की मौजूदा OBC लिस्ट को रद करना। मंत्री अग्निमित्रा पॉल (Minister Agnimitra Paul) ने कहा कि कोटा पात्रता तय करने के लिए एक समिति बनाई जाएगी।
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सूचना और सांस्कृतिक मामले तथा अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा विभागों द्वारा धार्मिक आधार पर चलाई जा रही योजनाएं इस महीने के अंत कर जारी रहेंगी। जून से इन्हें रोक दिया जाएगा। इसलिए इन योजनाओं को बंद करने का फैसला एक बड़ा नीतिगत बदलाव है। राज्य सरकार का मानना है कि कल्याणकारी कार्यक्रम धार्मिक पहचान पर आधारित नहीं होने चाहिए। पिछली तृणमूल सरकार ने राज्य में सत्ता में आने के एक साल बाद इमामों, मुअज्जिनों और मंदिर के पुजारियों के लिए मासिक मानदेय की घोषणा की थी।
2012 में शुरू हुई थी योजना
इन योजनाओं में से पहली योजना 2012 में शुरू की गई थी। सरकार ने पूरे पश्चिम बंगाल में इमामों के लिए मासिक मानदेय की घोषणा की थी। इस योजना के तहत, रजिस्टर्ड इमामों को हर महीने 2,500 रुपए मिलते थे, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर तबके से आने वाले धार्मिक नेताओं को मदद मिल सके। इसके तुरंत बाद, इसी तरह का एक आर्थिक सहायता कार्यक्रम मुअज्जिनों के लिए भी शुरू किया गया, ये वे लोग होता हैं जो मस्जिदों में नमाजियों को नमाज के लिए बुलाते हैं। ये दोनों फंड अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से दिए जाते थे।
2020 में हिंदू पुजारियों को किया गया शामिल
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2020 में तत्कालीन राज्य सरकार ने हिंदू पुजारियों या पुरोहितों के लिए भी इसी तरह का भत्ता शुरू किया। इस कदम को आम तौर पर उस आलोचना का जवाब माना गया कि राज्य की मदद सिर्फ मुस्लिम धार्मिक नेताओं को ही मिल रही है। इस योजना के तहत, रजिस्टर्ड पुरोहितों को मासिक मानदेय मिलता था, जो शुरू में लगभग, 1,000 रुपए तय किया गया था और 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले इसे बढ़ाकर 2,000 रुपए कर दिया गया।
इस योजना के तहत, रजिस्टर्ड पुरोहितों को मासिक मानदेय मिलता था, जो शुरू में लगभग 1,000 रुपये तय किया गया था और 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले इसे बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दिया गया।