नई दिल्ली। ईरान (Iran) ने बड़ा ऐलान कर दुनिया को बड़ी राहत भरी खबर दी है। उसने कहा है कि अगले 30 दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों की तादाद फिर से पहले जैसी हो सकती है। यानी जंग से पहले जितने जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, उतने फिर से गुजरने लगेंगे। इस बयान को दुनिया भर के देश राहत की खबर के तौर पर देख रहे हैं।
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बता दें कि होर्मुज का रास्ता दुनिया के लिए लाइफलाइन है। युद्ध होने के बाद से दुनियाभर के कई मुल्कों में ईंधन का संकट खड़ा हो गया। इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ा। अब होर्मुज को 30 दिनों में पहले जैसे करने की बात कही जा रही है। यानि युद्ध से पहले जो स्थिति थी वो बहाल की जाएगी। पिछले कुछ महीनों में मिडिल ईस्ट (Middle East) में तनाव बहुत बढ़ गया था। ईरान और दूसरे देशों के बीच तनातनी की वजह से इस रास्ते से गुजरने वाले जहाज कम हो गए। जहाज मालिक और तेल कंपनियां डरी हुई हैं कि कहीं उनके जहाज को नुकसान न हो। इस वजह से तेल की सप्लाई धीमी पड़ गई और दुनिया भर में तेल के दाम और बाजार की हालत पर असर पड़ रहा है।
इन सब के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका, ईरान और उस इलाके के कुछ और देशों के बीच एक समझौता लगभग तय हो गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि इस डील में होर्मुज को फिर से खोलना शामिल है और इसका ऐलान जल्द होगा।
पाकिस्तान की भी भूमिका
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Pakistan’s Prime Minister Shehbaz Sharif) ने बताया कि उनके देश ने ईरान के नेताओं से बातचीत की है और यह बातचीत बहुत अच्छी रही। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच अगले दौर की बातचीत जल्द ही होने वाली है।
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ब्रिटेन ने क्या कहा?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (British Prime Minister Keir Starmer) ने भी इस पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में जो तरक्की हुई है, वो अच्छी बात है। स्टार्मर ने साफ कहा कि हमें एक ऐसे समझौते की जरूरत है जो इस जंग को खत्म करे और होर्मुज को फिर से पूरी तरह खोले।
होर्मुज खुलने से भारत को क्या फायदा?
होर्मुज का रास्ता अगर पहले की तरह सुचारू हो जाता है तो ये भारत के लिए भी राहत की खबर होगी। क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। युद्ध के डर से जहाज होर्मुज का रास्ता नहीं ले रहे और लंबे रूट से आना पड़ रहा है। इससे बीमा का भी खर्च बढ़ रहा है। रास्ता अगर सेफ होता है तो माल ढुलाई का खर्च खटेगा। इससे सीधे तौर से भारत को निर्यात-आयात में फायदा होगा।
इसका दुनिया पर क्या असर होगा?
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अगर यह समझौता सच में हो जाता है और होर्मुज से फिर पहले जैसी तादाद में जहाज गुजरने लगते हैं तो इसका सीधा फायदा पूरी दुनिया को मिलेगा। तेल और गैस की सप्लाई ठीक होगी। दाम स्थिर होंगे। और जो देश इस रास्ते पर निर्भर हैं, उनकी इकोनॉमी को राहत मिलेगी।