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Mission West Asia : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने CDS और तीनों सेना प्रमुखों के साथ की हाई-लेवल बैठक

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। भारत के रक्षा क्षेत्र और सैन्य रणनीति के लिहाज से आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh)  ने एक उच्च-स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक बुलाई है, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों का पूरा शीर्ष नेतृत्व एक साथ मौजूद हैं।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच CDS जनरल अनिल चौहान और तीनों सेना प्रमुखों थल सेनाध्यक्ष (जनरल उपेंद्र द्विवेदी), नौसेना प्रमुख (एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी), और वायु सेना प्रमुख (एयर चीफ मार्शल एपी सिंह) के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की, जिसका उद्देश्य भारत के रणनीतिक हितों, समुद्री सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए ‘रिस्पांस प्लान’ तैयार करना है। यह बैठक एकीकृत रक्षा नीति को दर्शाती है, जिसमें नौसेना द्वारा समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और आकस्मिक निकासी योजनाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।

थल सेनाध्यक्ष सीमा सुरक्षा और जमीनी अभियानों की स्थिति पर इनपुट दे रहे हैं। नौसेना प्रमुख समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर में बढ़ती हलचल पर अपडेट साझा कर रहे हैं। वायु सेना प्रमुख हवाई सुरक्षा और लंबी दूरी की मारक क्षमता पर चर्चा कर रहे हैं।

बैठक का मुख्य एजेंडा: पश्चिम एशिया का संकट

बैठक का तात्कालिक कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और युद्ध की स्थिति है। इसके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है। यदि संघर्ष बढ़ता है, तो भारत की तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापारिक मार्ग प्रभावित हो सकते हैं। खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर उन्हें निकालने की योजना पर भी चर्चा की संभावना है। भारत अपनी सीमाओं और सैन्य ठिकानों को किसी भी अप्रत्याशित स्थिति के लिए हाई अलर्ट पर रख रहा है।

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बैठक में केवल बाहरी खतरों पर ही नहीं, बल्कि आंतरिक सुधारों पर भी चर्चा हो रही है। तीनों सेनाओं को एक साथ मिलाकर एकीकृत कमांड बनाने की दिशा में हो रही प्रगति की समीक्षा। रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करने और ‘मेड इन इंडिया’ हथियारों व तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना। साइबर सुरक्षा, ड्रोन तकनीक और अंतरिक्ष-आधारित रक्षा प्रणालियों के एकीकरण पर विशेष जोर। हालांकि मुख्य ध्यान पश्चिम एशिया पर है, लेकिन सीडीएस और सेना प्रमुखों के साथ एलएसी (LAC) और एलओसी (LoC) पर मौजूदा स्थिति की भी समीक्षा की जा रही है। हिमालयी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास और गर्मियों के मौसम में सेना की तैनाती के नए प्रोटोकॉल पर चर्चा अनिवार्य है।

यह बैठक इस बात का संकेत है कि भारत अपनी सुरक्षा नीतियों को लेकर अब ‘प्रतिक्रियात्मक’ के बजाय ‘सक्रिय’ रुख अपना रहा है। तीनों सेनाओं का एक छत के नीचे आना और रणनीतिक भविष्य पर चर्चा करना भारत की सैन्य शक्ति के एकीकरण का प्रतीक है।

रिपोर्ट: सुशील कुमार साह

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