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मान्यता है कि मोहिनी एकादशी का व्रत करने वालों सौभाग्य, सुख, सफलता, समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। मां लक्ष्मी की कृपा से घर में खुशहाली आती है। मोहिनी एकादशी पर विशेष रूप से बाँकेबिहारी की पूजा की जाती है।
पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 7 मई को सुबह 10 मिनट से शुरू होकर 8 मई को दोपहर 12:29 पर समाप्त होगा। उदया तिथि के अनुसार मोहिनी एकादशी का व्रत 8 मई को रखा जाएगा, जिसमें पारण 9 मई को किया जाएगा।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु ने मोहिनी नामक अप्सरा का रूप धरा था। पुराणों की मानें तो, श्रीहरि के मोहिनी रूप में में प्रकट होने से भगवान शिव भी मोहित हो गए थे।
मोहिनी एकादशी पर स्वर्ण दान, भूमि दान, अन्नदान, गौदान, जलदान, जूते, छाता, फल के दान से अधिक पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। ये व्रत 1000 गौदान करने के समान फल देता है।
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क्या खाएं और क्या परहेज करें
फलाहार करें
व्रत में केवल फल, दूध, और मेवे का सेवन करें।
अनाज और मसालेदार भोजन से बचें
इस दिन चावल और अन्य अनाज का सेवन वर्जित है।
पानी ज्यादा पिएं
दिनभर ऊर्जा बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।