नई दिल्ली। उत्तर भारत में इस समय भीषण गर्मी लू का प्रकोप झेल रहा है। अप्रैल माह में तापमान में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इस बीच मानसून (Monsoon) को लेकर भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अच्छी खबर दी है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मंगलवार को बताया कि इस मानसून (Monsoon) में भारत में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। वहीं, पूरे मौसम के दौरान अल नीनो की स्थिति की संभावना को खारिज कर दिया।
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सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र (Mrityunjay Mohapatra) ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत में चार महीने के मानसून मौसम (जून से सितंबर) में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है, तथा संचयी वर्षा दीर्घ अवधि औसत 87 सेमी का 105 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम मानसून वर्षा से जुड़ी अल नीनो की स्थिति इस बार विकसित होने की संभावना नहीं है।
मौसम विभाग (Meteorological Department) की यह भविष्यवाणी कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि कृषि क्षेत्र का भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 18% का योगदान देता है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम रविचंद्रन (M Ravichandran, Secretary, Ministry of Earth Sciences) ने मंगलवार को कहा कि इस साल दीर्घकालिक मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, मॉनसूनी बारिश औसत से 105% तक ज्यादा हो सकती है।
इसके साथ ही IMD ने पूरे मौसम के दौरान अल नीनो की स्थिति की संभावनाओं को खारिज कर दिया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के प्रमुख मृत्युंजय महापात्रा (Mrityunjay Mohapatra) ने नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “भारत में चार महीने के मॉनसून मौसम (जून से सितंबर) में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है, और कुल संचयी दीर्घावधि वर्षा औसत से 105 फीसदी ज्यादा यानी 87 सेमी तक रहने का अनुमान है।”
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अलनीनो की संभावना नहीं
उन्होंने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम मॉनसूनी वर्षा से जुड़ी अल नीनो (El Nino) जैसी स्थिति के इस बार विकसित होने की संभावना नहीं है। बता दें कि देश में मॉनसून आमतौर पर 1 जून के आसपास केरल में दस्तक देता है। उसके बाद वह आगे बढ़ते हुए पूरे देश में छा जाता है। फिर सितंबर के मध्य में मॉनसून की वापसी शुरू हो जाती है।
डराने वाली क्या बात?
उन्होंने इसके साथ ही कुछ डराने वाली बातों का भी जिक्र किया और कहा कि देश के कुछ हिस्से पहले से ही अत्यधिक गर्मी से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अप्रैल से जून के बीच अनेक राज्यों में काफी अधिक संख्या में लू चलने की संभावना है। इससे बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ सकता है और कुछ हिस्सों में सूखे की समस्या खड़ी हो सकती है। उन्होंने कहा कि पेयजल का भी संकट खड़ा हो सकता है।
भारत एक कृषि प्रधान देश है। इसके लिए मॉनसून बहुत महत्वपूर्ण है,क्योंकि अधिकांश सिंचाई मॉनसूनी बारिश पर ही निर्भर करती है। खेतीबारी देश के लगभग 42.3 प्रतिशत आबादी की मुख्य आजीविका का आधार है और यह देश के सकल घरेलू उत्पाद में 18.2 प्रतिशत का योगदान देता है।