नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Congress MP Shashi Tharoor) ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, खासकर नीट-यूजी पेपर लीक विवाद (NEET-UG Paper Leak Controversy) को लेकर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने बार-बार होने वाली इन गड़बड़ियों को पूरी एक पीढ़ी के साथ विश्वासघात (Betrayal of an Entire Generation) बताया।
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थरूर ने कहा कि आप ऐसी व्यवस्था चला रहे हैं, जिसमें परीक्षाओं की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं किया जा सकता। जहां छात्र तैयारी में बहुत मेहनत की है, अचानक यह देखते हैं कि पेपर लीक हो गया, भ्रष्टाचार है, बेईमानी है और पूरी प्रक्रिया दूषित हो गई है। कभी-कभी परीक्षाएं रद्द करनी पड़ती हैं और उन्हें फिर से शुरुआत करनी पड़ती है।
उन्होंने भारत की परीक्षा प्रणाली की विश्व स्तर की प्रणालियों से भी तुलना की और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता कहा, दुनिया में कई प्रतियोगी परीक्षाएं निष्पक्ष तरीके से कराई जाती हैं, चाहे वह एसएटी हो, कैम्ब्रिज परीक्षाएं हों या आईएससी आदि। उन्होंने पूछा, ऐसा क्यों है कि केवल हमारी सरकारी व्यवस्था में ही बार-बार गड़बड़ी हो रही हैं? सरकार ऐसी स्थिति में क्यों है कि वह राष्ट्रीय परीक्षा जैसी सरल प्रक्रिया की निष्पक्षता और ईमानदारी की गारंटी नहीं दे पा रही है? थरूर ने इन लगातार संकटों के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, यह वास्तव में सरकार की कमी है और सरकार को जिम्मेदारी लेते हुए इस समस्या को ठीक करने के लिए कदम उठाने चाहिए। नहीं तो यह पूरी एक पीढ़ी के साथ विश्वासघात है। इसके लिए हम केवल सरकार को ही दोष दे सकते हैं।
‘सरकार और एनटीएस जिम्मेदार’
उन्होंने आगे कहा कि सरकार, मंत्रालय, एनटीए और वे सभी लोग जिम्मेदार हैं, जिनकी वजह से ऐसी स्थिति पैदा हुई है। थरूर ने कहा, मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की पूरी जिम्मेदारी बनती है। यह दोबारा कभी नहीं होना चाहिए। यह पहली बार नहीं है। लेकिन यह आखिरी बार होना चाहिए।
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21 जून को दोबारा होगी परीक्षा
थरूर की यह टिप्पणी नीट-यूजी 2026 को लेकर चल रहे विवाद के बीच आई है। पेपर लीक और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों के बाद परीक्षा को 21 जून तक के लिए पुनर्निर्धारित किया गया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) मामले की जांच कर रहा है और कई गिरफ्तारियां भी कर चुका है। वहीं, देश के कई हिस्सों में छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।