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एमपी के सीधी में सालभर के भीतर 53 गर्भवती महिलाओं की मौत, मानवाधिकार आयोग ने सरकार से मांगा जवाब

By Harsh Gautam 
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सीधी: मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और गर्भवती महिलाओं की मौत के मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच सीधी जिले में प्रसव के दौरान या उसके आगे-पीछे 53 महिलाओं की जान चली गई। इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए आयोग ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना है और मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो हफ्तों के भीतर पूरी रिपोर्ट तलब की है।

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द इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट में इस पूरी सच्चाई को उजागर किया गया था, जिसके अनुसार सीधी जिले के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी ढांचे के साथ-साथ डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों की भारी कमी है। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल में सही इलाज न मिलने के कारण मरीजों को रीवा के बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है, जिससे कई महिलाएं रास्ते में ही दम तोड़ देती हैं। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में सड़कों की खराब हालत के चलते एम्बुलेंस गांवों तक नहीं पहुंच पाती और मॉनसून के दिनों में परिजनों को गर्भवती महिलाओं को खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने मानवाधिकार आयोग के इस कदम का स्वागत करते हुए पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करने की मांग की है। वहीं दूसरी तरफ, बीजेपी प्रवक्ता हितेश बाजपेयी ने कहा है कि पिछले दो दशकों में मातृ मृत्यु दर में सुधार हुआ है, लेकिन आदिवासी और दूरदराज के इलाकों में डॉक्टरों की कमी और कुपोषण जैसी चुनौतियां अब भी बड़ी हैं, जिन्हें ठीक करने के लिए सरकार नए मेडिकल कॉलेज खोल रही है।

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