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नीति आयोग की रिपोर्ट में खुलासा, 8.7 करोड़ भारतीय युवाओं का भविष्य अधर में, खरगे बोले- मोदी जी हर साल 2 करोड़ नौकरियों के वादे का क्या हुआ?

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। भारत में 15 से 29 वर्ष की आयु के अनुमानित 8.7 करोड़ युवा नॉट इन एजुकेशन, एम्प्लॉयमेंट, या ट्रेनिंग (NEET) श्रेणी में हैं, यानी वे न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न ही रोजगार में हैं और न ही कोई प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

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नीति आयोग (NITI Aayog) के अनुसार, आयोग की रीइमेजिनिंग स्किलिंग फॉर विकसित भारत@2047 शीर्षक वाली रिपोर्ट में इन युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें स्थानीय मांग के अनुसार हुनरमंद बनाने के लिए सब्सिडी वाले कौशल कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। यह अनुमान वर्ष 2021 में आयोजित राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के 78वें (National Sample Survey’s 78th) दौर के आंकड़ों पर आधारित है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Congress President Mallikarjun Kharge) ने एक्स पोस्ट पर लिखा कि मोदी सरकार (Modi Government) ने युवा भारत के लिए शिक्षा से रोज़गार तक के पूरे रास्ते को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग (NITI Aayog) का अनुमान है कि 15 से 29 साल की उम्र के 8.7 करोड़ युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न ही नौकरी या ट्रेनिंग में हैं। इनमें से लगभग 88 फीसदी युवा घर के कामों में लगे हैं। साथ ही, युवाओं में बेरोज़गारी दर 15.6 फीसदी है, और युवा महिलाओं में यह चौंकाने वाले 19.5 फीसदी तक पहुंच गई है।

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ग्रेजुएशन के बाद नौकरियां कहां हैं?

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20 से 29 साल की उम्र के बेरोज़गार भारतीयों में 67% ग्रेजुएट हैं, जबकि 15 से 25 साल की उम्र के ग्रेजुएट युवाओं में बेरोज़गारी दर लगभग 40% है। परिवार अपनी बचत खर्च करते हैं, छात्र एजुकेशन लोन लेकर डिग्री हासिल करते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि नौकरियां ही नहीं हैं।

हर साल 2 करोड़ नौकरियों के वादे का क्या हुआ?

उस वादे के हिसाब से, भारत में 12 सालों में 24 करोड़ नौकरियां होनी चाहिए थीं। इसके बजाय, सरकारी विभागों में लाखों पद खाली पड़े हैं और सुरक्षित नौकरियों की जगह कॉन्ट्रैक्ट और पार्ट-टाइम काम ने ले ली है। भारत के ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ (जनसांख्यिकीय लाभ) को ‘डेमोग्राफिक डिज़ास्टर’ (जनसांख्यिकीय आपदा) में कौन बदल रहा है?

महंगी और अपर्याप्त शिक्षा, पेपर लीक, भर्ती में देरी, स्किल्स (कौशल) का बढ़ता अंतर और अच्छी नौकरियों का खत्म होना – इन सबने एक पूरी पीढ़ी के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। मोदी जी, आपने वादा किया था कि आप वो कर दिखाएंगे जो पिछली सरकारें 70 सालों में नहीं कर पाईं।

आपने उस दावे को सच कर दिखाया है: एक ऐसा एजुकेशन सिस्टम जो महंगा है और RSS के प्रभाव में है, ऐसी परीक्षाएं जिन पर युवा भरोसा नहीं कर सकते, और ऐसी डिग्रियां जिनके साथ नौकरियां नहीं मिलतीं।

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