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बिहार से शुरु हुआ SIR अब जब दिल्ली में दस्तक दे चुका है, तब सत्ताधीशों को पता चला कि कांग्रेस पहले दिन से इसे खामियों से भरा क्यों कह रही थी: खरगे

भाजपा के ही कई बड़े नेता-भाजपा के वरिष्ठतम, लालकृष्ण आडवाणी जी, मौजूदा विदेश मंत्री, दिल्ली के उपराज्यपाल (LG), राज्यसभा सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री आदि शामिल हैं, इन सबको अब नोटिस दिया गया। हालत यह कि कि इससे पहले भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिक व पूर्व नौसेना प्रमुख को भी नोटिस जारी किए जा चुके है।

By शिव मौर्या 
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नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश में चल रही सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है। विपक्षी दल के नेता लगातार इसको लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने SIR को लेकर सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया हैं। उन्होंने लिखा, बिहार से शुरु हुआ SIR अब जब दिल्ली में दस्तक दे चुका है, तब शायद सत्ताधीशों को पता चल रहा है कि कांग्रेस पार्टी पूरे process को पहले दिन से Flawed क्यों कह रही थी? SIR केवल भाजपा द्वारा वोट चोरी व लोकतंत्र को खत्म करने का औज़ार ही नहीं है बल्कि ये Flawed Process एक Frankenstein Monster जिसने अब उसी के लोगों को फंसा दिया है।

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भाजपा के ही कई बड़े नेता-भाजपा के वरिष्ठतम, लालकृष्ण आडवाणी जी, मौजूदा विदेश मंत्री, दिल्ली के उपराज्यपाल (LG), राज्यसभा सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री आदि शामिल हैं, इन सबको अब नोटिस दिया गया। हालत यह कि कि इससे पहले भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिक व पूर्व नौसेना प्रमुख को भी नोटिस जारी किए जा चुके है।

उन्होंने सोशल आगे लिखा, बंगाल में जिन लोगों के नाम काटकर उन्हें वोट देने से रोका गया, उनमें अब तक फैसला हुए मामलों में 93% लोग अपनी अपील जीत गए-यानि 1,13,943 लोगों को फिर से मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। वाह! किस आधार पर उनका मताधिकार छीना गया? ऊपर से चुनाव आयोग आज आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर के “VIP/marked electors” का वर्णन करता है। क्या अब भारत के Universal Adult Franchise में मतदाताओं की कोई Special Category है— VIP मतदाता और आम मतदाता? क्या हमारे संविधान ने जो One Person, One Vote, One Value का सिद्धांत दिया था, ये उसकी अवेहलना नहीं है? क्या VIP वोट अब ज्यादा क़ीमती हो गया है?

SIR के पहले तीन चरणों में 31 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 13.8 करोड़ मतदाता सूची से बाहर हुए—यानी 94.78 करोड़ मतदाताओं में से करीब 14.61%, उनपर हाथ पर हाथ धरे किसके इशारे पर बैठा रहता है? VIPs के लिए Press Release, करोड़ों आम मतदाताओं के लिए खामोशी।

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