1. हिन्दी समाचार
  2. एस्ट्रोलोजी
  3. Pitru Paksha 2026 Start Date :  पितृ पक्ष कब से शुरू हो रहा ?  जानें पिंड दान का महत्व

Pitru Paksha 2026 Start Date :  पितृ पक्ष कब से शुरू हो रहा ?  जानें पिंड दान का महत्व

सनातन धर्म में पूर्वजों और पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे पावन समय 'पितृ पक्ष' (श्राद्ध महालय) माना जाता है। वर्ष में एक बार आने वाले इन 15 दिनों के दौरान श्रद्धालु अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी और पूर्वजों की आत्मशांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में अर्पित किए गए अन्न-जल से पितर तृप्त होते हैं और अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Pitru Paksha 2026 Start Date :  सनातन धर्म में पूर्वजों और पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे पावन समय ‘पितृ पक्ष’ (श्राद्ध महालय) माना जाता है। वर्ष में एक बार आने वाले इन 15 दिनों के दौरान श्रद्धालु अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी और पूर्वजों की आत्मशांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में अर्पित किए गए अन्न-जल से पितर तृप्त होते हैं और अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

पढ़ें :- 07 अक्टूबर 2026 का राशिफल: बुधवार के दिन इन राशियों को मेहनत का मिलेगा अच्छा परिणाम

पूरे साल में एक बार 15 दिनों के लिए आने वाला पितृ पक्ष एक मात्र ऐसा समय है, जब लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं। उनके लिए श्राद्ध और पिंड दान करते है।

पौराणिक मान्यता है कि पितृ पक्ष में पिंड दान और तर्पण करने से पूर्वजों का पेट साल भर के लिए भर जाता है, जिससे उनकी आत्मा भटकती नहीं है।

प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी पितृ पक्ष की शुरुआत और तारीख (26 और 27 सितंबर) को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम है। काशी यानी बनारसी पंचांग के अनुसार 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध होगा, जबकि 27 सितंबर से प्रतिपदा श्राद्ध के साथ पितृ पक्ष की शुरुआत होगी।

26 सितंबर को होगा पूर्णिमा श्राद्ध

पढ़ें :- 'योगी के दोबारा CM बनने पर यूपी के स्कूलों में पढ़ाई जाएगी वैदिक मैथ्स!' राजनाथ सिंह ने अयोध्या में किया बड़ा ऐलान

26 सितंबर को उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाएगा, जिनका निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ था। इसे पूर्णिमा श्रद्ध कहा जाता है।

पितृ पक्ष
पितृ पक्ष में पिंडदान को श्राद्ध कर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। आमतौर पर चावल, तिल, जो आदि से पिंड बनाए जाते हैं और विधि-विधान के साथ पितरों को अर्पित किए जाते हैं।
श्राद्ध
इसी वजह से इस दौरान परिवार के लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध करते हैं।
तर्पण
पिंडदान के साथ तर्पण की भी खास परंपरा है. तर्पण का अर्थ ही पितरों को तृप्त करना माना जाता है। इसमें जल के साथ तिल और कुश आदि अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद पितरों का स्मरण करते हुए उनके लिए प्रार्थना की जाती है।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...