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एक गांव, एक बदलाव, एक नई शुरुआत, अकोदरा – भारत का पहला डिजिटल गांव

By Sushil Sah 
Updated Date

गुजरात। हर पहली शुरुआत के पीछे एक छोटी सी कहानी होती है पहली ट्रेन, पहली उड़ान, पहला फोन और अब पहली डिजिटल क्रांति। भारत की हर पहली कहानी सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि बदलाव की शुरुआत होती है। आज हम सुनायेंगे उस गांव की कहानी, जिसने साबित कर दिया कि भविष्य सिर्फ बड़े शहरों में नहीं बनता। जहां गांव की गलियों से निकली एक नई सोच ने पूरे देश को रास्ता दिखाया अकोदरा जहां गांव ने भविष्य से मुलाकात की – भारत का पहला डिजिटल गांव।

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एक समय था जब गांव में पैसे का लेन-देन करने के लिए लोगों को बैंक की लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था। किसान अपनी फसल बेचने के बाद भुगतान का इंतजार करते थे और छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी नकदी साथ रखना जरूरी होता था। लेकिन गुजरात के एक छोटे से गांव ने इस सोच को बदल दिया। एक ऐसा गांव जहां डिजिटल इंडिया की झलक देश ने पहली बार देखी।

गुजरात के साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर क्षेत्र में स्थित अकोदरा गांव कभी एक सामान्य भारतीय गांव की तरह ही था। यहां के लोगों की जिंदगी खेती और पशुपालन पर निर्भर थी। गांव में लगभग 200 परिवार रहते थे और आबादी करीब 1200 के आसपास थी। साल 2015 में इस गांव में एक नई शुरुआत हुई। ICICI बैंक ने अकोदरा को डिजिटल गांव बनाने की पहल शुरू की। उद्देश्य था गांव के हर व्यक्ति को डिजिटल लेन-देन से जोड़ना। गांव के परिवारों को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ा गया। लोगों को एटीएम कार्ड दिए गए और मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल सिखाया गया।

अब अकोदरा में बदलाव साफ दिखाई देने लगा था। महिलाओं को दूध या सब्जी खरीदने के लिए हमेशा पर्स में नकदी रखने की जरूरत नहीं थी। डेयरी में दूध जमा करने से लेकर किसानों को फसल का भुगतान मिलने तक, पैसों का लेन-देन डिजिटल तरीके से होने लगा। गांव की छोटी दुकानों तक मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट की सुविधा पहुंच गई। जहां कभी नकदी का इंतजार होता था, वहां अब कुछ ही पलों में पैसा खाते में पहुंच जाता था। अकोदरा की पहचान सिर्फ डिजिटल गांव के रूप में नहीं बनी। यह गांव पशुपालन के क्षेत्र में भी आगे बढ़ा।

यहां पशुओं के लिए बेहतर व्यवस्था विकसित की गई और गांव को देश के पहले एनिमल हॉस्टल के रूप में भी पहचान मिली। यह बदलाव सिर्फ तकनीक का नहीं था बल्कि गांव के लोगों की सोच बदलने का भी था। अकोदरा ने दिखाया कि डिजिटल क्रांति सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। एक छोटा सा गांव भी नई तकनीक को अपनाकर देश के लिए उदाहरण बन सकता है। आज जब भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, तब गुजरात का अकोदरा हमें याद दिलाता है कि बदलाव की शुरुआत कहीं से भी हो सकती है।

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रिर्पोट:

कल्पना पांडेय

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