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कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने पुरुषों को दी नसीहत, बोले-‘पराई औरत के चक्कर में पड़े तो रावण की तरह जलोगे’

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज (Storyteller Aniruddhacharya Maharaj) ने एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में कर्म, मुफ्त की राजनीति, युवाओं के प्रेम संबंधों, शादी और रिश्तों में बढ़ती हिंसा जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता के लिए कर्म करना जरूरी है और हर चीज मुफ्त में मिलने की आदत व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने से रोक सकती है।

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अनिरुद्धाचार्य (Aniruddhacharya) ने कहा कि आज समाज में हर चीज मुफ्त में पाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, लोग बिना मेहनत किए सुविधाएं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कर्म प्रधान है, कर्म नहीं करोगे तो खाओगे क्या? उन्होंने मुफ्त सुविधाओं की राजनीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अगर व्यक्ति को हर चीज बिना मेहनत के मिलती रहे तो उसकी काम करने की क्षमता कमजोर हो सकती है। उन्होंने बच्चों का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर छोटे बच्चे को चलने ही न दिया जाए और हर वक्त सहारा दिया जाए, तो उसके पैरों में मजबूती कैसे आएगी? बच्चा गिरेगा, उठेगा और फिर चलेगा, तभी उसके पैरों में ताकत आएगी। अनिरुद्धाचार्य (Aniruddhacharya) ने कहा कि इसी तरह व्यक्ति को भी जीवन में संघर्ष और मेहनत करने का अवसर मिलना चाहिए। लगातार मुफ्त सुविधाओं पर निर्भर रहने से व्यक्ति आत्मनिर्भर बनने के बजाय दूसरों पर निर्भर हो सकता है।

युवाओं को दी प्रेम संबंधों से बचने और पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह

युवाओं के प्रेम संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पढ़ाई और करियर बनाने की उम्र में युवाओं को अपना ध्यान भटकने नहीं देना चाहिए, उन्होंने एक युवक का उदाहरण भी सुनाया, जो उनके पास आया था, युवक ने बताया कि अनिरुद्धाचार्य की बात सुनकर उसने अपना प्रेम संबंध खत्म कर दिया, क्योंकि उसका ध्यान पढ़ाई से हट रहा था।

अनिरुद्धाचार्य (Aniruddhacharya) ने कहा कि युवाओं को ऐसे रिश्तों में पड़ने से पहले यह समझना चाहिए कि सामने वाला व्यक्ति वास्तव में उनसे प्रेम करता है या किसी स्वार्थ के लिए उनके साथ है, उन्होंने युवाओं से पढ़ाई, मेहनत और करियर पर ध्यान देने की अपील की। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि पति-पत्नी के रिश्ते के बीच हस्तक्षेप करना सही नहीं है, उन्होंने कहा कि वे पति-पत्नी के बीच तलाक कराने के पक्ष में नहीं हैं और वैवाहिक रिश्ते में बाहर के व्यक्ति को दखल नहीं देना चाहिए।

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‘शादी से पहले और बाद में चरित्र को पवित्र रखना चाहिए’

शादी और प्रेम संबंधों के संदर्भ में अनिरुद्धाचार्य (Aniruddhacharya)  ने कहा कि व्यक्ति को अपने चरित्र को लेकर सजग रहना चाहिए। उनके मुताबिक, विवाह के बाद पति या पत्नी के पुराने रिश्तों को लेकर विवाद पैदा हो सकता है, इसलिए युवाओं को रिश्तों को लेकर गंभीरता और जिम्मेदारी समझनी चाहिए, उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने माता-पिता के सपनों और उनकी उम्मीदों को भी ध्यान में रखना चाहिए। माता-पिता बच्चों को पढ़ने और अपना भविष्य बनाने के लिए भेजते हैं, इसलिए बच्चों को अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान देना चाहिए।

‘बढ़ती हिंसा रोकने के लिए बेटा-बेटी दोनों को संस्कार देना जरूरी’

आजकल प्रेम संबंधों और शादी से जुड़े मामलों में सामने आ रही हत्याओं पर सवाल पूछे जाने पर अनिरुद्धाचार्य (Aniruddhacharya)  ने कहा कि समाज में बढ़त हिंसा को केवल महिलाओं या पुरुषों के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अतीत में कुछ पुरुषों ने महिलाओं पर अत्याचा किए और दहेज के नाम पर महिलाओं को जलाने जैसी घटनाएं भी हुई। अब अगर कहीं महिलाएं हिंसा कर रही हैं तो इसका जवाब हिंसा नहीं हो सकता।

अनिरुद्धाचार्य (Aniruddhacharya)  के मुताबिक समाज में हिंसा और अत्याचार को रोकने के लिए माता-पिता को अपने बेटे और बेटी दोनों को संस्कार देने होंगे, बेटों को महिलाओं का सम्मान करना सिखाना होगा और बेटियों को पुरुषों का सम्मान करना। उन्होंने इसे गाड़ी के दो पहियों से जोड़ते हुए कहा कि जब दोनों पहिए संतुलित होंगे तभी गाड़ी आगे बढ़ेगी। समाज में भी पुरुष और महिला दोनों के अधिकार, सम्मान और जिम्मेदारी को समझना जरूरी है।

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अपनी कथाओं में आने वाले अलग-अलग और मुश्किल सवालों पर अनिरुद्धाचार्य (Aniruddhacharya)  ने कहा कि समाज के कई लोगों को अपनी समस्याएं और सवाल साझा करने के लिए उचित मंच नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि जब लोग अपनी बात किसी से कह नहीं पाते तो उनके मन का बोझ बढ़ता जाता है, उनकी कथाओं में लोग अपने सुख-दुख और निजी समस्याएं साझा करते हैं और वे अपनी समझ और गुरुजनों से मिले ज्ञान के आधार पर उनका जवाब देने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहती है कि लोगों की बात सुनी जाए और उन्हें सही दिशा दिखाई जाए।

सोशल मीडिया को लेकर अनिरुद्धाचार्य ने सकारात्मक राय रखी, उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने लोगों को अपनी बात कहने का एक मंच दिया है। उनके मुताबिक पहले अपनी बात कहने के लिए किसी व्यक्ति को ढूंढना पड़ता था, लेकिन अब सोशल मीडिया के जरिए लोग सीधे अपनी बात दूसरों तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया अच्छा है क्योंकि कम से कम लोगों को अपनी बात कहने और अपनी समस्याएं साझा करने का मौका तो मिलता है।

अनिरुद्धाचार्य (Aniruddhacharya)  ने मनुस्मृति और रामचरितमानस को लेकर कहा कि किसी भी ग्रंथ में जो बातें अच्छी लगें, उन्हें ग्रहण करना चाहिए और जो उचित न लगें, उन्हें छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कबीर के दोहे का उदाहरण देते हुए कहा कि व्यक्ति को दूसरों की बुराइयां तलाशने के बजाय अपने भीतर झांकना चाहिए। उनके मुताबिक, सनातन की किसी बात पर सवाल उठाना गलत नहीं है, लेकिन किसी भी धार्मिक ग्रंथ को बिना पढ़े या उसकी सही व्याख्या समझे खारिज करना उचित नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि समाज में सहनशीलता और आपसी सम्मान जरूरी है, उनके अनुसार, किसी भी धर्म या समुदाय के प्रति अनावश्यक टिप्पणी करने के बजाय सभी को अपनी-अपनी कमियों और अच्छाइयों को समझना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि जो अच्छा लगे उसे अपनाएं और जो गलत लगे उसे छोड़ दें, लेकिन किसी भी विषय पर राय बनाने से पहले उसे समझना जरूरी है।

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