नई दिल्ली। लोकसभा में कांग्रेस के नेता और सांसद राहुल गांधी ने कहा कि “शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण का मालिक कौन है? भारतीय शिक्षा व्यवस्था मोहरों की व्यवस्था है, प्रमाणपत्रों की व्यवस्था है। करोड़ों लोग सोचते हैं कि ऐसे प्रमाणपत्रों के बाद, अरबपतियों को लाखों रुपए देने के बाद उनके बच्चों को रोजगार मिल जाएगा। राहुल गांधी ने कहा कि यह सरासर झूठ है। आपके बच्चे इस देश में रोजगार नहीं पा सकते, चाहे वे कुछ भी करें। अरबपतियों ने देश की रोजगार व्यवस्था को नष्ट कर दिया है। अगर आईआईटी या आईआईएम के छात्रों को रोजगार नहीं मिल रहा है, तो आपको कैसे मिलेगा?
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— Congress (@INCIndia) January 27, 2025
नेता विपक्ष बोले हिंदुस्तान में विचारधारा की लड़ाई चल रही है। एक तरफ कांग्रेस है: जो संविधान को मानती है और इसके लिए लड़ रही है। दूसरी तरफ RSS-BJP है: जो संविधान के खिलाफ हैं, इसे कमजोर करते हैं और खत्म करना चाहते हैं। संविधान सिर्फ एक किताब नहीं है, इसमें हिंदुस्तान की हजारों साल पुरानी सोच है। इसमें अंबेडकर जी, महात्मा गांधी जी, भगवान बुद्ध, फुले जी जैसे महापुरुषों की आवाज है।
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राहुल गांधी ने कहा कि कुछ दिन पहले RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- ‘हिंदुस्तान को 15 अगस्त, 1947 को आजादी नहीं मिली, वो झूठी आजादी थी।’ ये सीधा संविधान पर आक्रमण है। BJP ने लोक सभा से पहले भी संविधान को खत्म करने की बात कही थी, इन्होंने कहा था कि अगर 400 सीटें आ गईं तो संविधान बदल देंगे। लेकिन उनके सामने कांग्रेस और INDIA के नेता व कार्यकर्ता खड़े हुए। नतीजा ये हुआ कि लोक सभा में नरेंद्र मोदी को संविधान के आगे माथा टेकना पड़ा। याद रखिए… जिस दिन संविधान खत्म हो गया, उस दिन देश के गरीबों के लिए कुछ नहीं बचेगा।
नेता विपक्ष बोले आजादी से पहले देश में गरीबों, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों के पास कोई अधिकार नहीं थे। सिर्फ राजा-महाराजाओं के पास अधिकार थे। आजादी के बाद संविधान बना तो देश में सभी को अधिकार मिले। BJP-RSS के लोग आजादी के पहले जैसा हिंदुस्तान चाहते हैं, जहां लोगों को कोई अधिकार न हों, सिर्फ अडानी-अंबानी जैसे अरबपतियों के पास सारे अधिकार हों। BJP-RSS चाहती है कि गरीब चुप रहें, भूखे मर जाएं, कोई सपना न देखें और हिंदुस्तान को अरबपति चलाएं।
नरेंद्र मोदी दो-तीन अरबपतियों को सारे कांट्रेक्ट दे देते हैं। आज अडानी-अंबानी जैसे लोगों को हिंदुस्तान का पूरा धन सौंपा जा रहा है। संविधान में कहां लिखा है कि हिंदुस्तान का धन अडानी के हवाले कर देना चाहिए? संविधान में लिखा है। हिंदुस्तान के सभी नागरिक एक समान हैं । सभी को अपना भविष्य बनाने का मौका मिलना चाहिए यहां अरबपति अपने बच्चों की शादी में हजारों करोड़ रुपए खर्च कर देते हैं, लेकिन आपको अपने बच्चों की शादी के लिए कर्ज लेना पड़ता है, क्योंकि रोजगार नहीं हैं। याद रखिए- जितना धन इन अरबपतियों के हाथ में जाएगा, आपके बच्चों को उतना कम रोजगार मिलेगा।
नरेंद्र मोदी ने अरबपतियों का 16 लाख करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया है, लेकिन देश के किसान, मजदूर और छात्रों का पैसा माफ नहीं किया। GST आप लोग देते हैं, मेहनत आप करते हैं और हिंदुस्तान में चीन का माल अडानी-अंबानी बेचते हैं। चीन के युवाओं को रोजगार मिलता है। अडानी-अंबानी को फायदा होता है और आपके बच्चों के हाथ में रोजगार नहीं रहता। जनता की जेब से पैसा निकलकर सीधे अडानी-अंबानी की जेब में जाता है।
निजीकरण होता है तो देश के संस्थान निजी हाथों में जाते हैं। देश में बच्चे प्राइवेट कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने जाते हैं। बीमारी में लोग प्राइवेट हॉस्पिटल में जाते हैं। लोग अपने बच्चों को प्राइवेट संस्थानों में पढ़ाने और लाखों रुपए फीस देने के बाद सोचते हैं कि उनका भविष्य बन जाएगा। जबकि ये सरासर झूठ है। इस देश में युवाओं को रोजगार नहीं मिल सकता, भले ही उनके पास क्षमता, ऊर्जा और बड़े सपने हों।
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राहुल गांधी ने कहा कि देश में नोटबंदी हुई, गलत GST लागू हुई। लेकिन अगर आप छोटे दुकानदारों, व्यापारियों से पूछेंगे तो पता चलेगा कि नोटबंदी और गलत GST ने उन्हें ख़त्म कर दिया। देश में यही छोटे दुकानदार, व्यापारी लाखों लोगों को रोजगार देते हैं, लेकिन इस सरकार ने उन्हें बर्बाद कर दिया। लोग अपने बच्चों की पढ़ाई पर लाखों रुपए खर्च कर रहे हैं, लेकिन बिना रोजगार उनके सर्टिफिकेट कुछ नहीं हैं, क्योंकि यहां IIT-IIM वालों को नौकरी नहीं मिल रही। आपको समझना होगा कि देश के दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और गरीब सामान्य वर्ग को फिर से गुलाम बनाया जा रहा है।
राम मंदिर के कार्यक्रम और नई संसद के उद्घाटन में देश की आदिवासी राष्ट्रपति को जाने नहीं दिया। राम मंदिर के कार्यक्रम में एक भी गरीब, किसान, मजदूर नहीं दिखा इसीलिए हमें पता लगाना है कि देश के धन का कितना भाग दलित, पिछड़े, आदिवासियों, गरीब सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के पास है। मैंने देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों की लिस्ट निकाली। पता चला कि इनके मालिक और मैनेजमेंट में कोई भी दलित, पिछड़े, आदिवासी वर्ग से नहीं है।
मैंने नरेंद्र मोदी के सामने कहा कि कांग्रेस पार्टी की सरकार आते ही हम देश में जातिगत जनगणना कराएंगे। तेलंगाना, कर्नाटक में हमने काम शुरू कर दिया है। कुछ ही समय में पता चल जाएगा कि वहां दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों की कितनी भागीदारी है। कौन सी संस्था में कौन-कौन बैठा है? इस क्रांतिकारी निर्णय के बाद देश की 90% आबादी को पता लग जाएगा कि देश में उनकी कितनी भागीदारी है। नरेंद्र मोदी कहते हैं कि मैं OBC हूं, लेकिन आज तक देश के पिछड़े वर्ग को यह नहीं मालूम कि इस देश में उनकी कितनी आबादी है? ये दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के खिलाफ अन्याय है।
आज़ादी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर थी क्योंकि उसके बाद पहली बार हिंदुस्तान के दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और गरीबों को संविधान द्वारा अधिकार मिले। मगर, मोहन भागवत कहते हैं कि वो सच्ची आज़ादी नहीं थी – वो इसलिए क्योंकि BJP और RSS भारत के संविधान को नहीं मानते। वो बहुजनों और गरीबों से उनके अधिकार छीन कर उन्हें फिर से ग़ुलाम बनाना चाहते हैं।
मोहन भागवत ने कुछ दिन पहले संविधान का अपमान किया। उनके मुताबिक देश को जो आजादी मिली, वो सच्ची आजादी नहीं थी। इसका मतलब है कि मोहन भागवत संविधान को नहीं मानते हैं। उन्होंने बाबा साहेब अंबेडकर जी, संविधान का अपमान किया है। कांग्रेस के बब्बर शेरों का काम संविधान की रक्षा करना है। BJP-RSS के लोग जहां भी संविधान का अपमान करते हुए दिखें, वहां उन्हें चट्टान की तरह खड़ा होना है। मैं उन सभी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देता हूं, जो हमारी विचारधारा और संविधान के लिए लड़ते हैं।