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Rohini Vrat 2026 : रोहिणी व्रत आत्मसंयम और मानसिक शांति का मार्ग खोलता है , जानें तिथि और महत्व

By अनूप कुमार 
Updated Date

Rohini Vrat 2026 : जून माह के व्रत उपवास की श्रृंखला में रोहणी व्रत का विशेष महत्व है। जैन धर्म में रोहिणी व्रत का आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह व्रत प्रत्येक माह में उस दिन रखा जाता है, जब सूर्योदय के समय रोहिणी नक्षत्र का प्रबल योग रहता है। पौराणिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। परंपरा के अनुसार, रोहिणी व्रत का संकल्प 3, 5 या 7 वर्षों के लिए लिया जाता है. इनमें 5 वर्ष 5 माह की अवधि को विशेष रूप से श्रेष्ठ माना गया है।

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जून 2026 रोहिणी व्रत 
पंचांग और नक्षत्र गणना के अनुसार, रोहिणी व्रत 14 जून 2026, रविवार को रखा जाएगा. इस दिन सूर्योदय के समय रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, इसलिए यह तिथि व्रत, पूजा और आराधना के लिए अत्यंत शुभ एवं फलदायी मानी जाती है।

रोहिणी व्रत का महत्व
आत्मिक शुद्धि :  यह व्रत पुराने कर्मों के क्षय, आत्मसंयम और मानसिक शांति का मार्ग खोलता है। महिलाएं विशेष रूप से अपने पति की दीर्घायु और परिवार के कल्याण की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं।

धार्मिक मान्यता है कि रोहिणी व्रत को श्रद्धा, संयम और नियमों के साथ करने से जीवन के अनेक कष्टों का निवारण होता है। साथ ही आर्थिक समस्याओं, मानसिक तनाव और पारिवारिक बाधाओं से भी राहत मिलने की मान्यता है।

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