Shani Jayanti 2026 : सूर्य पुत्र शनि और ग्रह मंडल के न्यायाधीश शनि महाराज की जयंती ज्येष्ठ अमावस्या को मनाई जाती है। इस बार 16 मई को शनि जयंती मनाई जएगी। ज्योतिष गंथों के अनुसार, शनिदेव कर्मों का हिसाब करते हैं और दण्ड देते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, शनिदेव अनुशासन प्रिय हैं और अत्याचारियों को उचित दंड देते है। अगर आप भी न्यायधीश कहे जाने वाले शनि देव का आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो आपको इस साल शनि जयंती पर पूजा करते समय कुछ बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए।
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नीले रंग के वस्त्र
हिंदू मान्यता के अनुसार शनि पूजा में तन और मन दोनों की पवित्रता के बहुत मायने होते हैं। ऐसे में शनि पूजा से पहले साधक को स्नान-ध्यान करने के बाद नीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए।
सूर्य देवता
हिंदू मान्यता के अनुसार शनिदेव की पूजा हमेशा सूर्य देवता के उदय होने से पहले या फिर सूर्य देवता के अस्त होने के बाद करनी चाहिए।
पूजा की सही दिशा
जिस तरह जीवन में किसी मंजिल पर पहुंचने के लिए सही दिशा मायने रखती है, कुछ वैसे ही शनि की पूजा भी सही दिशा की ओर मुंह करके करनी चाहिए। वास्तु के अनुसार शनि पश्चिम दिशा का स्वामी है, इसलिए साधक को हमेशा पश्चिम की तरफ मुंह करके शनि की पूजा और उनके मंत्र आदि का जप करना चाहिए।
दाएं या फिर बाएं खड़े होकर पूजा करनी चाहिए
हिंदू मान्यता के अनुसार शनिदेव की पूजा करते समय कभी भी उनके ठीक सामने नहीं खड़े होना चाहिए। साधक को हमेशा शनिदेव के चित्र या मूर्ति के दाएं या फिर बाएं खड़े होकर पूजा करनी चाहिए। नीले रंग के पुष्प जरूर अर्पित करें।
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दान
शनि जयंती वाले दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को काला तिल, काला कंबल, चाय की पत्ती, लोहे का सामान, आदि का दान करना चाहिए।