नागपुर। नागपुर प्रवास में धर्मसभा को संबोधित करते हुए पश्चिमाम्नाय द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी श्री सदानन्द सरस्वती जी महाराज ने प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर हुई घटना की घोर निंदा की। शंकराचार्य स्वामी श्री सदानन्द सरस्वती जी महाराज (Shankaracharya Swami Shri Sadanand Saraswati Ji Maharaj) ने कहा कि अभी मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) में स्नान के लिए दुखद घटना घटित हुई जहां बटुक ब्राह्मणों को प्रशासन के कुछ कर्मचारियों व पुलिस प्रशासन के द्वारा चोटी पकड़-पकड़ कर घसीटा गया।
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शिखा का अर्थ नहीं जानते हैं ये लोग, धर्म का अर्थ ही नहीं जानते पढ़ें तो जानें शिखा जो होती है वहां ब्रह्मरंध्र होता है। ब्रह्मरंध्र का अपमान नहीं किया जा सकता है। वहां ब्रह्म का साक्षात्कार करना यानि कुंडली जागृत करने के लिए ही ब्रह्मरंध्र ये है। षडचक्र भेदन करने के ही हम ब्रह्मरंध्र में साधक जाता है। इस तरह से ब्राह्मणों का साधकों का यतियों का गंगा स्नान करने से रोका गया। आचार्य जी को, शंकराचार्य जी को रोका गया। बटुक ब्राह्मणों, छोटे—छोटे विद्यार्थी और साधु भी थे उन्हें रोका गया। उनको घसीट करके उनको दंड दिया गया है। ये प्रशासन का अहंकार… ये सत्ता हमेशा नहीं रहती है। कभी अपनी सत्ता दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। गंगा स्नान करने जाने वालों को गौ हत्या का पाप लगता है। ये शास्त्र वचन है। मेरा वचन नहीं है।
गंगा स्नान करने में जो विघ्न डालता है। उसे गौ हत्या का पाप लगता है। इसलिए ऐसा काम कभी नहीं करना चाहिए। यदि कोई हमें बल, शक्ति और ताकत प्राप्त हुई है तो उसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। प्रशासन के इस कृत्य की हम घोर निंदा करते हैं।